बरेली में फर्जी वेबसाइट बनाकर वीजा फ्रॉड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, एक आरोपी गिरफ्तार

फर्जी वेबसाइट

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बरेली में महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी वेबसाइट बना कर डिग्री और वीजा फ्रॉड करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह के द्वारा एक फर्जी वेबसाइट तैयार की गई थी, जिससे छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा था। बरेली पुलिस ने इस मामले में आरोपी सुजय राय को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका साथी फरार है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा

विश्वविद्यालय के कोऑर्डिनेटर डॉ. अख्तर हुसैन ने पुलिस अधिकारियों को इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि एक वेबसाइट www.mjpru.org.in बनाकर विश्वविद्यालय के नाम पर गलत और भ्रामक जानकारी अपलोड की जा रही थी। इस वेबसाइट के माध्यम से फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट तैयार की जाती थी, जिससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा था।

साइबर थाने और बारादरी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

इस सूचना के बाद बारादरी पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। एसएसपी बरेली के आदेश पर साइबर सेल और बारादरी पुलिस ने मिलकर जांच शुरू की। जांच के दौरान, वेबसाइट के डोमेन प्रोवाइडर Hostinger से तकनीकी जानकारी प्राप्त की गई, जिससे आरोपी का नाम सामने आया। पुलिस ने लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर निवासी आरोपी सुजय राय को गिरफ्तार किया, जबकि उसका साथी फरार हो गया।

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आरोपी से मिली जानकारी

गिरफ्तार आरोपी सुजय राय से पूछताछ में पता चला कि वह बीटेक पास है और विदेश जाने के इच्छुक लोगों के लिए फर्जी डिग्रियां तैयार करता था। वह और उसका साथी फर्जी वेबसाइट के जरिए छात्रों को वीजा दिलवाने का दावा करते थे। छात्रों के लिए फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार की जाती थीं, और इन दस्तावेजों के जरिए स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन किया जाता था। जब वेरिफिकेशन होता था, तो फर्जी वेबसाइट का यूआरएल देकर संबंधित संस्थाओं को भ्रमित कर दिया जाता था। इसके बदले आरोपी मोटी रकम लेते थे।

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फर्जी दस्तावेज बरामद, फरार आरोपी की तलाश जारी

गिरफ्तार आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, डेल कंपनी का लैपटॉप और विश्वविद्यालय के नाम से बनी दो फर्जी डिग्रियों की फोटोस्टेट बरामद की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस तरीके से कितने लोगों को विदेश भेजा गया है। इस मामले में आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला बढ़ाया गया है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।

यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराध और फर्जीवाड़े की दुनिया में लगातार नई तकनीक के जरिए फ्रॉड किए जा रहे हैं। पुलिस की कड़ी कार्रवाई और साइबर सेल की टीम की मेहनत से इस गिरोह का पर्दाफाश किया गया है, लेकिन अब सवाल यह है कि कितने लोग इस धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है।

यह भी पढ़ें : अलीगढ़ एसएसपी ने नशे में डूबे बच्चों को बचाकर शिक्षा की मुख्यधारा में किया शामिल

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