Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए जाने वाले भक्तों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब मंदिर परिसर में स्थित राम दरबार के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को किसी अलग VIP अनुमति या विशेष पास की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आप भी जल्द ही अयोध्या जाने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि दर्शन की यह नई व्यवस्था किस तरह काम करेगी।
सामान्य कतार से ही होंगे दोनों दर्शन
अब तक लागू व्यवस्था के अनुसार, राम मंदिर की पहली मंजिल पर बने राम दरबार के दर्शन के लिए सीमित संख्या में विशेष पास जारी किए जाते थे। इस वजह से दूर-दराज से आने वाले कई आम श्रद्धालुओं को राम दरबार के दर्शन का अवसर नहीं मिल पाता था, जिससे उन्हें थोड़ी असुविधा भी होती थी।
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब इस पास व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत, सभी भक्त सबसे पहले सामान्य लाइन में लगकर गर्भ गृह में विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे। इसके बाद वे उसी कतार के माध्यम से सीधे पहली मंजिल पर जाकर राम दरबार के दर्शन भी कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी और सभी भक्तों को बिना किसी भेदभाव के दर्शन का अवसर मिलेगा।
आरती के लिए तत्काल पास की शुरुआत
राम दरबार के अलावा, ट्रस्ट ने आरती दर्शन के लिए भी एक नई और सुविधाजनक व्यवस्था शुरू की है। अब आरती में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए तत्काल पास जारी किए जा रहे हैं।
यह तत्काल पास बिड़ला धर्मशाला के सामने स्थित यात्री सुविधा केंद्र पर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं को अपना पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड दिखाना होगा। ट्रस्ट के अनुसार, फिलहाल सीमित संख्या में (प्रतिदिन 14 पास) तत्काल पास दिए जा रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या और जरूरत को देखते हुए भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने का प्रयास
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अयोध्या आने वाले हर श्रद्धालु की यात्रा को सरल और पारदर्शी बनाना है। विशेष पास की बाध्यता खत्म होने से अब किसी भी तरह की विशेष सिफारिश की आवश्यकता नहीं रहेगी।
अब आम भक्त बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के सीधे कतार में लगकर रामलला और राम दरबार दोनों के दर्शन एक साथ कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं के समय की बचत होगी, बल्कि मंदिर परिसर में भीड़ का प्रबंधन भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुगम हो सकेगा।
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