Ayodhya deepotsav 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित होने वाला दसवां दीपोत्सव अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने और राज्य की विकास यात्रा को दर्शाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार का आयोजन परंपरा, आधुनिकता और प्रशासनिक उपलब्धियों का एक अनूठा संगम होगा। इस वर्ष की शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण पहली बार रामलीला का ‘सोलह शृंगार’ होगा, जिसे स्थानीय टीमों द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा।
साकेत महाविद्यालय से निकलेगी भव्य शोभायात्रा
शोभायात्रा की शुरुआत साकेत महाविद्यालय से होगी, जहां कुल 21 विशेष झांकियों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इन झांकियों में राज्य सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के साथ-साथ रामायण के सभी सातों कांडों का सजीव प्रदर्शन किया जाएगा। पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा तैयार की जा रही सात झांकियां बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित होंगी। इन झांकियों को तकनीकी और कलात्मक रूप से बेहतर बनाने का जिम्मा एक कंपनी को सौंपा गया है।
14 झांकियों में दिखेगी विकास और जनकल्याण की झलक
सूचना विभाग की ओर से 14 अलग-अलग झांकियां तैयार की जा रही हैं, जो प्रदेश में हुए बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक विकास को उजागर करेंगी। इनमें मुख्य रूप से जल जीवन मिशन, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी), आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, पुलिस सुरक्षा, मिशन शक्ति, पीएम आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, आत्मनिर्भर नारी और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं और विकास कार्यों की रचनात्मक प्रस्तुति देखने को मिलेगी।
लोक कलाओं का महासंगम और 650 से अधिक कलाकार
अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के अनुसार, इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का एक विशेष रूप नजर आएगा। पहली बार अयोध्या की 16 स्थानीय टीमें रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को ‘सोलह शृंगार’ की परंपरा के साथ प्रस्तुत करेंगी। इसके अलावा, देश के 14 राज्यों और उत्तर प्रदेश की 11 सांस्कृतिक टीमें अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगी।
लगभग 650 से अधिक कलाकार अपनी लोक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें हरियाणा का फाग, केरल का कथकली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया नृत्य तथा मध्य प्रदेश और बंगाल की लोक परंपराएं मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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