ATS ने संदिग्ध बांग्लादेशियों की पहचान का जिम्मा संभाला, नगर निगम ने योजना बनाई

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। कचरा बीनने वाले यह लोग धीरे धीरे लोगों के घरों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। कई लोग इनसे घरों में काम करवा रहे हैं। झाड़ू पोछा से लेकर कई कामों में उनका सहयोग ले रहे हैं। लखनऊ महापौर सुषमा खर्कवाल ने साफ किया है कि इन लोगों का सत्यापन कराया जायेगा। लखनऊ में इनकी संख्या बड़ी मात्रा में है। ATS ने नगर निगम से सफाई कर्मियों का पूरा रिकार्ड मांगा है। महापौर ने कहा कि शहर और प्रदेश के लिये बड़ी चुनौती है। कांग्रेसी नेता के बयान पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेसी ऐसी समस्याओं की जड़ है।       

एटीएस की कार्रवाई    

एटीएस ने नगर निगम को एक पत्र भेजकर कूड़ा प्रबंधन और सफाई कार्य में लगे श्रमिकों की पहचान करने के लिए आवश्यक जानकारी मांगी है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की पहचान के लिए की जा रही है। सूचना के अनुसार, लखनऊ में कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से सफाई कार्य में लगे अधिकतर श्रमिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या हो सकते हैं।

नगर निगम का प्रयास

नगर निगम ने कार्यदायी संस्थाओं से ठेकेदारों और श्रमिकों की पूरी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। नगर निगम के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को नकारते हुए सभी ठेकेदारों से जानकारी देने की अपील की है। इसके साथ ही, नगर निगम ने योजना बनाई है कि कूड़ा उठाने वाली ठेलियों को एक रंग (लाल या हरा) और नंबरिंग के साथ चिह्नित किया जाएगा, जिससे संदिग्ध बांग्लादेशी श्रमिकों की पहचान की जा सके। महापौर सुषमा खर्कवाल ने पत्र लिखकर कहा था कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या नगर निगम के विभिन्न वार्डों में झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं। कूड़ा बीनने और कबाड़ बेचने के साथ यह लोग अराजकता भी फैलाते हैं। नगर आयुक्त गौरव कुमार की तरफ से भी आदेश जारी कर ठेलियों में नंबर व उसका एक रंग रखने को कहा गया है, जिससे कोई अन्य कूड़ा उठाते मिले तो पकड़ा जा सके।

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एनआरसी और अन्य पहल

पुलिस ने एनआरसी नंबर (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) मांगा था, लेकिन अधिकांश संदिग्ध श्रमिकों के पास यह दस्तावेज़ नहीं था। इसके चलते कई सफाई कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़कर चले गए। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कुछ श्रमिकों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है, और उनकी गतिविधियों की जांच की जाएगी।

आगे की योजना

नगर निगम ने सफाई श्रमिकों की पहचान और उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए और कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। ठेकेदारों के माध्यम से सभी कार्यरत बांग्लादेशी और रोहिंग्या श्रमिकों की जांच की जाएगी, ताकि अवैध रूप से रहने वालों की पहचान की जा सके और उन्हें उचित कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े।

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