मथुरा में साइबर अपराधियों पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 21 थानों में तैनात हुए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

मथुरा

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मथुरा जिले में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और संगठित अभियान शुरू किया है। इस विशेष पहल का उद्देश्य डिजिटल ठगों की पहचान कर उनके पूरे नेटवर्क को उजागर करना और पीड़ितों को तुरंत राहत प्रदान करना है। मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान को जिले में साइबर सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

21 थानों में टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट की तैनाती

इस अभियान के तहत जिले के सभी 21 थानों में एक-एक ऐसे उप निरीक्षक की तैनाती की गई है, जो बीटेक डिग्रीधारी हैं और साइबर क्राइम से जुड़ी आधुनिक तकनीकों में कौशल रखते हैं। ये अधिकारी ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल ठगी, बैंकिंग अपराध, कॉल डिटेल एनालिसिस और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार के अनुसार, अब साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही पीड़ित को तकनीकी सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। थाने स्तर पर ही प्रशिक्षित अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे।

ठगी होते ही तुरंत एक्शन

पुलिस की इस नई व्यवस्था के तहत जैसे ही किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी या डिजिटल फ्रॉड की सूचना मिलेगी, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट उप निरीक्षक तुरंत संबंधित मोबाइल नंबर को बंद कराने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसके साथ ही, जिस बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है, वहां संपर्क कर पैसे को होल्ड कराने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि रकम आगे ट्रांसफर न हो सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती समय में तुरंत कार्रवाई से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

साइबर ठगों के गढ़ों पर कार्रवाई

इस अभियान के तहत मथुरा पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े संवेदनशील इलाकों में भी सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। गोवर्धन थाना क्षेत्र के गांव देवसेरस, मुड़सेरस, मड़ौरा और नगला अकातिया में विशेष पुलिस अभियान चलाया गया। इन क्षेत्रों में साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों की जांच की गई। देवसेरस गांव में पुलिस ने एक अस्थाई चौकी भी स्थापित की है, ताकि लगातार निगरानी रखी जा सके और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

डिजिटल पहचान से होगा नेटवर्क का पर्दाफाश

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों की डिजिटल पहचान तैयार करना है। मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट, कॉल रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रांजैक्शन के माध्यम से ठगों के पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया जाएगा। इससे न केवल अपराधियों की गिरफ्तारी आसान होगी, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

आम जनता को मिलेगा सीधा फायदा

इस पहल से आम नागरिकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब साइबर ठगी की स्थिति में पीड़ित को तुरंत अपने नजदीकी थाने पर जाकर सहायता मिल सकेगी। पहले जहां साइबर अपराध की जांच में देरी होती थी, वहीं अब तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की मौजूदगी से कार्रवाई तेज और प्रभावी होगी।

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