BIMSTEC Meeting New Delhi: मंगलवार को नई दिल्ली में बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की पहली ऐतिहासिक बैठक होने जा रही है, जिसकी मेजबानी भारत करेगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन आतंकावाद, साइबर खतरों, सीमा-पार अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथ और अवैध वित्तीय लेन-देन जैसी चुनौतियों से निपटने में सभी सदस्य देशों की एकजुटता का प्रतीक है। अमित शाह के अनुसार बेहतर समन्वय और परस्पर सहयोग से पूरे बिम्सटेक क्षेत्र को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए सभी देश पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
आतंकवाद और सीमा पार अपराधों से निपटने का लक्ष्य
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा कि नई दिल्ली में आयोजित पहली बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करना भारत के लिए अत्यंत गर्व की बात है। इसी के साथ उन्होंने इस सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी देशों के गृह मंत्रियों एवं प्रतिनिधिमंडलों का हार्दिक अभिनंदन किया।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बैठक का मुख्य लक्ष्य आतंकवाद, सीमा पार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों, कट्टरपंथ और तस्करी जैसी साझा सुरक्षा समस्याओं से मिलकर निपटना है। इसके साथ ही उन्होंने अवैध वित्तीय लेन-देन और साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए सभी सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर बल दिया।
बिम्सेट (BIMSTEC) का इतिहास
बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन की स्थापना वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा के तहत हुई थी। शुरुआत में इसमें 4 देश शामिल थे, बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड जिस कारण इसे ‘BIST-EC’ के नाम से जाना जाता था। हालांकि उसी वर्ष दिसंबर में म्याँमार के जुड़ने पर इसका नाम ‘BIMST-EC’ पड़ा। इसके बाद वर्ष 2004 में जब नेपाल और भूटान भी इस संगठन से जुड़े, जिसके बाद इसे बिम्सटेक (BIMSTEC) नाम दिया गया।
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