UNICEF : भारत में पिछले एक दशक के दौरान लड़कियों की शिक्षा और सशक्तीकरण के क्षेत्र में हुई प्रगति की संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हनान सुलेमान ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत में लड़कियों की शिक्षा में सुधार परिवारों में उनके महत्व को बढ़ती मान्यता को दर्शाता है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी होने के कारण यहां लड़कियों के सशक्तीकरण में हुई प्रगति का असर वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने लड़कियों की शिक्षा, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत में लड़कियों की शिक्षा में हुआ सुधार: हनान सुलेमान
हनान सुलेमान ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। उनके मुताबिक, यह बदलाव परिवारों में लड़कियों की शिक्षा और उनके महत्व को लेकर बढ़ती समझ को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 25.3 करोड़ किशोर हैं। इतनी बड़ी किशोर आबादी वाले देश में लड़कियों के लिए शिक्षा और अवसरों में सुधार का महत्व भारत की सीमाओं से कहीं आगे तक जाता है। सुलेमान ने कहा कि भारत ने यह दिखाया है कि लगातार निवेश, बड़े स्तर पर सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी नीतिगत कदमों के माध्यम से वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने लड़कियों के सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
इंजीनियरिंग की कक्षाओं में बढ़ी लड़कियों की भागीदारी
कार्यक्रम में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने भी लड़कियों की शिक्षा में आए बदलावों का उदाहरण दिया। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का जिक्र करते हुए बताया कि उनके छात्र जीवन और आज की स्थिति में काफी अंतर आया है। हरीश ने कहा कि जब वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे, तब उनकी कक्षा में कोई लड़की नहीं थी। उस समय इस विषय को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। हालांकि, उन्होंने बताया कि आज उनके विश्वविद्यालय में कई कक्षाओं में लड़कियों की भागीदारी लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे अपने जीवनकाल में देखा गया वास्तविक बदलाव बताया। उनके अनुसार, शिक्षा के अवसर बढ़ने से लड़कियों को उन क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है, जहां पहले पुरुषों का वर्चस्व अधिक था।
पी. हरीश ने कहा कि शिक्षा में प्रगति के बावजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में पुरुषों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया कि तकनीक की दुनिया में अक्सर पुरुषों की उपलब्धियों की चर्चा होती है, जबकि महिलाओं की भूमिका को उतनी पहचान नहीं मिलती। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि AI के विकास और इस्तेमाल में लड़कियों तथा महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। उनके मुताबिक, तकनीक का क्षेत्र ऐसा होना चाहिए, जहां महिलाओं को समान अवसर मिलें और वे नवाचार में सक्रिय भूमिका निभा सकें। हरीश ने यह भी बताया कि भारत में डिजिटल टूल्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से लड़कियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। AI आधारित ट्यूटोरियल और बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
लड़कियों की शिक्षा में निवेश से मजबूत होंगे परिवार और समाज
सिएरा लियोन की उप विदेश मंत्री जेनेबा बंगुरा ने कहा कि लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए किया गया निवेश परिवारों, समुदायों और देशों को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि एक लड़की की प्रगति में निवेश का सकारात्मक प्रभाव व्यापक होता है। लड़कियां केवल सहायता की जरूरत रखने वाली नहीं हैं, बल्कि वे बदलाव लाने वाली, नवाचार करने वाली, नेतृत्व करने वाली और विकास को आगे बढ़ाने वाली भी हैं। बंगुरा के मुताबिक, लड़कियों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने से अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज बनाने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं की भूमिका और डिजिटल शिक्षा पर भी चर्चा
कार्यक्रम में लाइबेरिया के स्थायी प्रतिनिधि लुईस ब्राउन ने 1989 से 2003 के बीच चले गृहयुद्ध को समाप्त करने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को याद किया। वहीं, अल्जीरिया के स्थायी प्रतिनिधि अमर बेंदजामा ने कहा कि आज लड़कियों के लिए तैयार किया जाने वाला माहौल उनके भविष्य के योगदान को प्रभावित करता है। उन्होंने लड़कियों के अधिकारों और अवसरों में निवेश को साझा भविष्य में निवेश बताया और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, समान अवसर, डिजिटल तकनीक और नेतृत्व में लड़कियों की भागीदारी प्रमुख विषय रहे। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना जरूरी है। भारत में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि निरंतर निवेश, सामुदायिक सहयोग और समावेशी नीतियों के जरिए लड़कियों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। AI और डिजिटल शिक्षा के विस्तार के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि लड़कियां तकनीक की केवल उपयोगकर्ता न रहें, बल्कि उसके विकास और नेतृत्व में भी बराबर की भागीदार बनें।



