Kanpur News : उत्तर प्रदेश के कानपुर में कम शुद्धता वाले सोने के गहनों पर फर्जी हॉलमार्क जैसा निशान लगाकर उन्हें असली बताने के कथित मामले का खुलासा हुआ है। चौक सर्राफा इलाके में सामने आए इस मामले में पुलिस ने लेजर कटिंग मशीन जब्त की है। आरोप है कि इस मशीन की मदद से कम कैरेट के आभूषणों पर हॉलमार्क जैसा निशान बनाया जा रहा था, ताकि उन्हें अधिक शुद्ध सोने के रूप में पेश किया जा सके। मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब एक महिला सोने के गहने बेचने के लिए फीलखाना थाना क्षेत्र की एक ज्वेलर्स शॉप पर पहुंची। जांच में गहनों की शुद्धता कम मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। अब पुलिस मामले से जुड़े लोगों और कथित फर्जीवाड़े के नेटवर्क की जांच कर रही है।
महिला गहने बेचने पहुंची तो सामने आया मामला
जानकारी के मुताबिक, एक महिला फीलखाना थाना क्षेत्र स्थित ज्वेलर्स की दुकान पर सोने के आभूषण बेचने पहुंची थी। दुकानदार ने जब गहनों की जांच की तो उनकी शुद्धता अपेक्षा से कम पाई गई। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। शुरुआती जांच में मामला सामान्य मिलावट से आगे बढ़कर कथित फर्जी हॉलमार्किंग से जुड़ा नजर आया। पुलिस की पड़ताल में पता चला कि अक्षय गुप्ता नाम के व्यक्ति ने महिला को ये आभूषण दिए थे और बदले में उससे 40 हजार रुपये लिए थे।
इसके बाद पुलिस ने गहनों की खरीद-फरोख्त और उन पर बनाए गए निशानों की जांच शुरू की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कथित धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई की जा रही है।
लेजर कटिंग मशीन से बनाया जा रहा था फर्जी हॉलमार्क
पुलिस की जांच के मुताबिक, चौक सर्राफा स्थित दिनेश वर्मा की दुकान पर लेजर कटिंग मशीन की मदद से कम कैरेट के सोने के गहनों पर हॉलमार्क जैसा निशान बनाया जा रहा था। आरोप है कि इस तरीके का इस्तेमाल कम शुद्धता वाले आभूषणों को अधिक शुद्ध बताकर बाजार में बेचने या गिरवी रखने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, कथित फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों की भूमिका और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। हॉलमार्क का उद्देश्य ग्राहकों को सोने की शुद्धता के बारे में प्रमाणित जानकारी देना है। ऐसे में यदि किसी आभूषण पर गलत तरीके से हॉलमार्क जैसा निशान बनाया जाता है, तो खरीदार उसकी वास्तविक शुद्धता को लेकर भ्रमित हो सकता है और उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पुलिस ने मशीन जब्त कर दर्ज किया मुकदमा
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी निशान बनाने में इस्तेमाल की जा रही लेजर कटिंग मशीन जब्त कर ली है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तरीके से कितने आभूषणों पर निशान लगाए गए और क्या इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए अन्य ग्राहकों को भी निशाना बनाया गया था। इसके अलावा, पुलिस आभूषणों की वास्तविक शुद्धता, उनकी खरीद-फरोख्त और संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
सोना खरीदने वालों के लिए क्यों जरूरी है हॉलमार्क की जांच?
सोने के गहने खरीदते समय उनकी शुद्धता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। ग्राहकों को केवल गहने पर बने निशान को देखकर उसकी शुद्धता के बारे में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। खरीदारी के दौरान बिल लेना, हॉलमार्क और छह अंकों वाले HUID नंबर की प्रामाणिकता की जांच करना तथा विश्वसनीय ज्वेलर्स से ही गहने खरीदना महत्वपूर्ण है। HUID नंबर को BIS Care ऐप के माध्यम से भी सत्यापित किया जा सकता है। कानपुर में सामने आए इस मामले ने आभूषण कारोबार में ग्राहकों के भरोसे और सोने की शुद्धता की जांच के महत्व को फिर से उजागर किया है। फिलहाल पुलिस कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।



