Indonesia Earthquake : इंडोनेशिया की धरती एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से कांप उठी है। रविवार सुबह आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 दर्ज की गई। अचानक आए तेज झटकों के कारण लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए तुरंत घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई में था।
सुबह का वक्त होने के कारण अधिकतर लोग अपने घरों में सो रहे थे या दिन की शुरुआत कर रहे थे, जिससे झटके महसूस होते ही चारों तरफ हड़कंप मच गया। इंडोनेशिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों (Pacific Ring of Fire) में गिना जाता है।
अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में भी आया था 5.3 तीव्रता का भूकंप
इंडोनेशिया से पहले, 1 अक्टूबर की सुबह अफगानिस्तान के हिंदूकुश इलाके में भी भूकंप के शक्तिशाली झटके दर्ज किए गए थे।
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) के अनुसार, अफगानिस्तान में आए भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई थी। यह झटका भारतीय समयानुसार सुबह करीब 6:59 बजे आया था और इसका केंद्र भी जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की गहराई में था।
जानिए क्यों आते हैं भूकंप और कैसे मापी जाती है इनकी तीव्रता?
धरती के भीतर होने वाली इस हलचल के पीछे का मुख्य कारण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से टेक्टोनिक प्लेटों का खिसकना है:
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टेक्टोनिक प्लेट्स की टक्कर: पृथ्वी की ऊपरी परत अंदर स्थित सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों पर टिकी है, जो लगातार बहुत धीमी गति से घूमती रहती हैं।
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फॉल्ट लाइन और ऊर्जा का उत्सर्जन: जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, रगड़ खाती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तो दबाव बनता है। जिस जगह ये टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन कहा जाता है। दबाव बढ़ने पर अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है, जो भूकंपीय तरंगों के रूप में सतह पर कंपन पैदा करती है।
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रिक्टर स्केल से मापन: भूकंप की तीव्रता और उसके प्रभाव को मापने के लिए वैज्ञानिक रिक्टर स्केल (Richter Scale) का प्रयोग करते हैं। यह पैमाना धरती के भीतर से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों के आधार पर भूकंप के केंद्र और उसकी भयावहता का सटीक आकलन करता है।
इंडोनेशिया जैसी जगहें लगातार टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के केंद्र में रहती हैं, जिससे वहां अक्सर ऐसे झटके महसूस किए जाते हैं। कम गहराई (10 किमी) पर आने वाले भूकंप सतह पर अधिक कंपन पैदा करते हैं, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा हमेशा बना रहता है।
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