FSSAI Bans Analogue Paneer: देश में असली पनीर के नाम पर बेचे जा रहे मिलावटी और बनावटी पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने कड़ा रुख अपनाया है। FSSAI ने पूरे देश में ‘एनालॉग पनीर’ (Analogue paneer) के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए नियमों में बदलाव को लेकर एक आधिकारिक ड्राफ्ट जारी किया गया है। नियामक का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को गुमराह होने से बचाना और असली डेयरी उत्पादों की शुद्धता बनाए रखना है।
पनीर के नाम पर नहीं बिकेगा एनालॉग प्रोडक्ट
FSSAI के ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अब कोई भी कंपनी या खाद्य विक्रेता वेजिटेबल ऑयल (वनस्पति तेल) और गैर-डेयरी सामग्रियों से बने उत्पादों को ‘पनीर’ कहकर नहीं बेच सकेगा। ‘डेयरी संदर्भ में एनालॉग’ श्रेणी के तहत पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत व्यवसायों को अपने उत्पाद के नाम, लेबल और विज्ञापनों में “पनीर” शब्द का उपयोग तुरंत बंद करना होगा।
यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सरकारी गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद आम जनता और कारोबारियों को सुझाव देने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है।
राज्यों में पहले ही लग चुका है प्रतिबंध
FSSAI के इस कदम से पहले ही कई राज्य सरकारें नकली पनीर के खिलाफ सख्त एक्शन ले चुकी हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में पाया गया था कि राज्य में लिए गए पनीर के 35% से अधिक सैंपल में वनस्पति वसा (Vegetable fat) की मिलावट थी।
इसके अलावा, गुजरात सरकार ने भी घटिया एनालॉग पनीर, चीज और बटर के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर राज्यव्यापी रोक लगा दी है। राज्य सरकार का मानना है कि ऐसे उत्पाद न केवल ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, बल्कि असली डेयरी किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई
FSSAI ने साफ किया है कि नियमों का पालन न करने वाले खाद्य कारोबारियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में निरीक्षण के दौरान मिलावटी घी और घटिया खाद्य सामग्री बेचने वाली कई इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। नया नियम लागू होने से बाजार में शुद्ध डेयरी उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को सही व सुरक्षित भोजन मिल सकेगा।

