PM Modi Seva sankalp yatra: युवाओं से संवाद में बोले प्रधानमंत्री- सेवा ही हमारी शासन व्यवस्था का मूल भाव, 2047 के संकल्प में युवा अहम

PM Modi Seva sankalp yatra

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PM Modi Seva sankalp yatra: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक निकाली जा रही ‘सेवा संकल्प यात्रा’ (seva sankalp yatra) के प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधा संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात से लेकर दिल्ली तक भारतीय जनता पार्टी की शासन व्यवस्था और संस्कारों का मूल आधार केवल सेवा ही रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पार्टी अपने पूरे राजनीतिक सफर में सेवा के इस मार्ग से कभी पीछे नहीं हटेगी और वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में देश के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

सेवा का मार्ग और नागरिक देवो भव का संकल्प

गुजरात के वडनगर से शुरू होकर काशी तक जाने वाली इस यात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों के युवा भाग ले रहे हैं। यह यात्रा PM Modi के सार्वजनिक जीवन में एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में 25 वर्ष पूरे होने और उनके 76वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित की जा रही है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के देवास जिले में मौजूद प्रतिभागियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब शासन के केंद्र में सेवा का भाव होता है, तो हर नीति में ‘नागरिक देवो भव’ का संकल्प झलकता है।

उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में कितनी भी बड़ी जिम्मेदारी या सत्ता मिल जाए, लेकिन हमारा प्राथमिक रास्ता हमेशा जनता की सेवा का ही रहना चाहिए। पीएम मोदी के अनुसार, ‘जन सेवा से देश सेवा’ ही उनके पूरे जीवन का मूलमंत्र रहा है। सरकार द्वारा गरीबों, महिलाओं, बेटियों और आदिवासियों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की नींव में भी यही विचार शामिल है।

Viksit Bharat 2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति और चुनाव अपनी जगह होते हैं, लेकिन देश का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और 2047 तक भारत को विकसित बनाना है। इस बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आकर जिम्मेदारी संभालनी होगी।

भारत में प्राचीन काल से ही यात्राओं और सेवा कार्य का गहरा सामाजिक महत्व रहा है। अपने राजनीतिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि वे अपने आचरण और व्यवहार से समाज में सेवा का सकारात्मक संदेश दें, क्योंकि ‘सेवा परमो धर्मः’ के भाव से ही समाज का वास्तविक कल्याण संभव है।

शक्ति की सप्त धाराओं का संदेश पहुंचाने का आह्वान

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने यात्रा में शामिल युवाओं से अपील की कि वे गांव-देहात के भ्रमण के दौरान वहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समाधानों से सीखें। साथ ही भारत की ‘विविधता में एकता’ के संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुंचाएं।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे यात्रा के दौरान आम लोगों के साथ ‘शक्ति की सप्त धाराओं’ पर चर्चा करें। उल्लेखनीय है कि इस विचार का जिक्र प्रधानमंत्री ने पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया था, जिसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। बातचीत के दौरान युवाओं ने भी यात्रा के अपने अनुभव प्रधानमंत्री के सामने रखे।

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