18th BRICS Summit: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के कूटनीतिक प्रयासों को एक बड़ी सफलता मिली है। ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (zero tolerance) की नीति का पुरजोर समर्थन किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से निपटने के दौरान अपनाए जाने वाले दोहरे मापदंडों को पूरी तरह खारिज करने पर भी सर्वसम्मति बनी है।
घोषणापत्र में कड़े शब्दों में निंदा
समूह द्वारा जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ (New Delhi declaration 2026) में पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का विशेष उल्लेख किया गया। इस दुखद घटना में 26 लोगों की जान चली गई थी। ब्रिक्स देशों ने एक सुर में इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि को किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।
सीमा पार घुसपैठ और फंडिंग पर गहरी चिंता
ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में विशेष रूप से सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, आतंकी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय मदद (टेरर फंडिंग) और उन्हें मिलने वाली सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर जोर दिया गया। संगठन ने कहा कि जब तक इन नेटवर्क पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक इस समस्या को समाप्त करना मुश्किल होगा।
धर्म और समुदाय से न जोड़ने की नसीहत
घोषणापत्र में यह बात भी साफ तौर पर कही गई कि आतंकवाद को किसी खास धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इसके साथ ही, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों, उनके समर्थकों और उन्हें पनाह देने वालों की जवाबदेही तय कर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया गया।
साझा सहयोग से ही संभव है मुकाबला
ब्रिक्स देशों ने माना कि आतंकवाद से अपने नागरिकों की सुरक्षा करना प्रत्येक देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए सभी देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा।
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