Prayagraj Flood : संगम नगरी प्रयागराज पर एक बार फिर बाढ़ का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश की वजह से गंगा और यमुना न नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। प्रयागराज में जलस्तर का खतरे का निशान 84.734 मीटर निर्धारित है, जबकि शनिवार सुबह तक गंगा का जलस्तर 81.11 मीटर और यमुना नदी 80.69 मीटर पर पहुंच चुकी हैं। नदियों के इस रौद्र रूप को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से गहराया संकट
प्रयागराज में नदियों के उफान पर होने की सबसे बड़ी वजह विभिन्न बैराजों और बांधों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी है। पिछले 24 घंटे के दौरान ही गंगा में 38 सेंटीमीटर और यमुना में 37 सेंटीमीटर पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हरिद्वार और कानपुर बैराज के साथ-साथ नरौरा एवं माताटीला बांधों से लगातार डिस्चार्ज जारी है, जो गंगा के जलस्तर को बढ़ा रहा है। वहीं केन, बेतवा, चंबल और टोंस जैसी सहायक नदियां उफान पर हैं और उनका पानी यमुना के जलस्तर को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है।
2 किमी लंबा गंगापथ डूबा, नागवासुकि मंदिर का रास्ता बंद
नदियों के तेज उफान के कारण शहर के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी दाखिल होने लगा है। सादियाबाद से लेकर नागवासुकि मंदिर तक बना करीब दो किलोमीटर लंबा गंगापथ पूरी तरह से नदी में समा गया है। गंगापथ की तरफ से प्रसिद्ध नागवासुकि मंदिर जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है और मंदिर चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। अब श्रद्धालुओं को केवल दारागंज की तरफ से ही मंदिर में प्रवेश मिल पा रहा है।
दारागंज में सड़क पर अंतिम संस्कार और बड़े हनुमान मंदिर पर असर
जलस्तर बढ़ने से सबसे विकट समस्या दारागंज घाट पर पैदा हो गई है। शवदाह के लिए बने सभी पारंपरिक घाट जलमग्न हो चुके हैं, जिसकी वजह से लोगों को मजबूरन सड़क के किनारे ही चिताएं जलाकर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। इसके अलावा लेटे हुए बड़े हनुमान जी के मंदिर कॉरिडोर की सीढ़ियों तक भी गंगा का पानी तेजी से चढ़ रहा है। उधर झूंसी के बदरा-सोनौटी गांव के ग्रामीणों ने डीएम से मुलाकात कर बाढ़ के दौरान बिजली गुल होने की समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।







