Karnataka TB Free : कर्नाटक का धारवाड़ जिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिसाल कायम करते हुए पूरी तरह तपेदिक (टीबी) मुक्त बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले की 72 ग्राम पंचायतों को आधिकारिक तौर पर टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के टीबी उन्मूलन अभियान को धारवाड़ में एक बड़े जन आंदोलन का रूप दिया गया है।
2023 से 2025 के बीच दिखा ऐतिहासिक बदलाव
नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में कर्नाटक और केरल के सांसदों के साथ टीबी उन्मूलन को लेकर एक परामर्श बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में धारवाड़ की प्रगति का विशेष उल्लेख करते हुए प्रह्लाद जोशी ने बताया कि वर्ष 2023 में जिले में केवल दो ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त थीं। हालांकि, लगातार जांच, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बदौलत 2025 तक यह संख्या बढ़कर 72 ग्राम पंचायतों तक पहुंच गई।
जांच अभियान और निक्षय मित्र पहल का असर
धारवाड़ में टीबी मरीजों के ठीक होने की सफलता दर 88 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। गहन जांच अभियान के तहत महज 130 दिनों में 161 एक्स-रे शिविर लगाकर 7,800 से अधिक लोगों की जांच की गई। इतना ही नहीं, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच जिले में 43,840 लोगों की टीबी जांच की गई, जो तय लक्ष्य का 124 प्रतिशत है। मरीजों को बेहतर इलाज के साथ पोषण संबंधी सहायता देने के लिए ‘निक्षय मित्र’ पहल के जरिए लगातार राशन व अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
‘टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प पर जोर
बैठक के दौरान सांसदों और अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘टीबी मुक्त भारत’ के लक्ष्य को समय से हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई। इस दौरान टीबी उपचार के लिए स्वदेशी शोध, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित स्क्रीनिंग और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को मजबूत करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और अनुप्रिया पटेल समेत स्वास्थ्य मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।







