Giloy Benefits : कोरोना काल के बाद से ही हर घर में जिस एक जड़ी-बूटी का नाम सबसे ज्यादा सुना गया, वह है गिलोय। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया’ (Tinospora Cordifolia) कहा जाता है। यह एक बेल वाला पौधा है जो जंगलों, झाड़ियों और अब तो लोगों के घरों की बालकनियों में भी आसानी से देखने को मिल जाता है। आयुर्वेद में गिलोय को ‘गुडूची’ या ‘अमृता’ भी कहा गया है, जिसका मतलब होता है वह औषधि जो कभी नष्ट नहीं होती और इंसान को निरोगी बनाती है। आइए जानते हैं कि यह छोटी सी बेल हमारी सेहत के लिए कितनी बड़ी मददगार साबित हो सकती है।
गिलोय की पहचान और नीम गिलोय की ख़ासियत
गिलोय की पत्तियां दिखने में पान के पत्ते या मनी प्लांट जैसी होती हैं, लेकिन इनका आकार थोड़ा बड़ा और रंग गहरा हरा होता है। आप इसे अपने घर में गमले में भी आसानी से उगा सकते हैं। आयुर्वेद का एक दिलचस्प नियम है कि गिलोय की बेल जिस पेड़ के सहारे ऊपर चढ़ती है, उसके औषधीय गुण भी अपने अंदर सोख लेती है। इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय को सबसे उत्तम और असरदार माना जाता है, जिसे ‘नीम गिलोय’ कहते हैं।
त्रिदोष नाशक है यह चमत्कारी बेल
गिलोय के पत्ते, जड़ और तना तीनों ही सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। हालांकि, इलाज में सबसे ज्यादा इसके तने का इस्तेमाल होता है। यह भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुणों से भरा होता है। बहुत कम जड़ी-बूटियां ऐसी होती हैं जो शरीर के तीनों दोषों—वात, पित्त और कफ—को एक साथ संतुलित कर सकें, और गिलोय उन्हीं में से एक है। यह शरीर में जमा टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्वों को बाहर निकालकर कई बीमारियों से हमारा बचाव करती है।
जानिए किन-किन गंभीर बीमारियों में रामबाण है गिलोय
अगर बात करें गिलोय के स्वास्थ्य लाभों की, तो यह सिर से लेकर पांव तक शरीर को दुरुस्त रखने में मदद करती है:
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अपच और कब्ज: अगर आपका पेट अक्सर खराब रहता है, तो रात को सोने से पहले आधा चम्मच गिलोय पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है।
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टाइप-2 डायबिटीज: गिलोय एक प्राकृतिक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है। सुबह खाली पेट 1 कप पानी में 2-3 चम्मच गिलोय का रस मिलाकर पीने से बढ़ा हुआ ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और इंसुलिन का निर्माण बढ़ता है।
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डेंगू और बुखार: डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने और तेज बुखार आने पर गिलोय का रस पीना बेहद फायदेमंद है। यह इम्यूनिटी को तेजी से बूस्ट करके मरीज को जल्दी ठीक करता है।
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एनीमिया (खून की कमी): खासकर महिलाओं में खून की कमी की समस्या ज्यादा देखी जाती है। शहद या पानी के साथ दिन में दो बार 2-3 चम्मच गिलोय जूस लेने से रेड ब्लड सेल्स बढ़ते हैं।
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लिवर के लिए टॉनिक: गिलोय सत्व लिवर को डिटॉक्स करता है और खून की सफाई करता है। चुटकी भर गिलोय सत्व को शहद के साथ लेने से लिवर स्वस्थ रहता है।
गिलोय का सही तरीके से इस्तेमाल करने का तरीका
गिलोय को मुख्य रूप से तीन तरीकों से डाइट में शामिल किया जाता है—गिलोय सत्व, गिलोय का रस (जूस) और गिलोय चूर्ण (पाउडर)। ध्यान रखें कि इसे लेने का समय बहुत मायने रखता है। जूस और काढ़े को हमेशा खाना खाने से एक या डेढ़ घंटे पहले लेना चाहिए, जबकि पाउडर को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।







