VVM 2026-27: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में इन दिनों विज्ञान को लेकर एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल कर रही है। इसी कड़ी में ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27’ नाम की एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा बच्चों का पंजीकरण सुनिश्चित करें। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि गांव से लेकर शहर तक का हर बच्चा अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा को पहचान सके और उसे आगे बढ़ा सके।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 (VVM 2026-27) क्या है
विद्यार्थी विज्ञान मंथन यानी वीवीएम, विज्ञान भारती द्वारा आयोजित की जाने वाली देश की सबसे बड़ी डिजिटल विज्ञान प्रतिभा खोज प्रतियोगिताओं में से एक है। यह प्रतियोगिता केवल भारत में ही नहीं, बल्कि मध्य-पूर्वी देशों के छह अन्य देशों में भी आयोजित की जाती है। कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थी इसमें भाग ले सकते हैं।
इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें भारत की प्राचीन और आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति से रूबरू कराया जाता है। इसके तहत स्कूल स्तर से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
VVM पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया और शुल्क
अगर आप या आपके घर का कोई बच्चा इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहता है, तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया बहुत आसान रखी गई है। छात्र 30 सितंबर 2026 तक आधिकारिक वीवीएम पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
प्रत्येक छात्र के लिए 200 रुपये का पंजीकरण शुल्क तय किया गया है। पोर्टल पर प्रतियोगिता से जुड़े नियम, अध्ययन सामग्री और जरूरी दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि समय रहते सभी पात्र विद्यार्थी इसमें अपना नाम दर्ज करा लें ताकि उन्हें तैयारी के लिए पूरा समय मिल सके।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
अक्सर देखा जाता है कि कई प्रतिभाशाली बच्चे आर्थिक तंगी के कारण इस तरह के मंचों से वंचित रह जाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं के लिए उनके स्टाइपेंड की राशि और माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का उपयोग पंजीकरण शुल्क देने के लिए किया जा सकता है।
सरकार की इस पहल का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे की प्रतिभा पैसों की कमी के कारण न रुके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुभवात्मक अधिगम
यह पूरी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना से मेल खाती है, जो रटने की प्रणाली के बजाय अनुभवात्मक अधिगम और खोजपरक सोच पर बल देती है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी तय करने का एक जरिया है।
स्कूलों में इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि माता-पिता भी अपने बच्चों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित कर सकें।
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