आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के Bhogapuram में विकास की एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यहां अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Alluri Sitarama Raju International Airport) का उद्घाटन किया। हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री के पहुंचने पर उनका काफी आत्मीयता से स्वागत किया गया, जहां स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक धिमसा नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी साथ मौजूद रहे।
अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित यह नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट 5,640 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है। यह हवाई अड्डा हर साल लगभग 60 लाख यात्रियों की आवाजाही को आसानी से संभालने में सक्षम है।
इसके यात्री टर्मिनल भवन को यात्रियों की सुविधा और समय की बचत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस हवाई अड्डे के चालू होने से उत्तर आंध्र प्रदेश में कनेक्टिविटी तो बेहतर होगी ही, साथ ही व्यापार, पर्यटन और रोजगार के कई नए रास्ते भी खुलेंगे।
आधुनिक तकनीक और हरित भवन मानक
इस हवाई अड्डे को बेहद स्मार्ट और हाईटेक बनाया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बायोमेट्रिक पैसेंजर प्रोसेसिंग, ऑटोमेटेड बैगेज हैंडलिंग और एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर जैसी उन्नत प्रणालियां लगाई गई हैं।
तकनीक के साथ-साथ यह एयरपोर्ट पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखता है। इसमें 5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा की बचत करने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। पूरे टर्मिनल को यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (USGBC) के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है।
सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित वास्तुशिल्प
हवाई अड्डे का डिजाइन पूरी तरह से आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है। इसके टर्मिनल की छत का आकार स्थानीय चुट्टिलू झोपड़ियों और अरकु घाटी के परिदृश्यों से प्रेरित है। वहीं, इसकी बनावट उड़ती हुई मछली की गति को दर्शाती है, जो आधुनिक वास्तुकला और क्षेत्रीय परंपरा का सुंदर मेल प्रस्तुत करती है।
विशाखापत्तनम में एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना
हवाई अड्डे के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी विशाखापत्तनम में 460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। यह आंध्र प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई होगी, जहां बड़े पैमाने पर चिप्स का उत्पादन किया जाएगा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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