S. Jaishankar Meets German Envoy : भारत और जर्मनी के बीच मजबूत होते रिश्तों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने बुधवार को भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन (Philip Ackermann) से विदाई मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने एकरमैन के कार्यकाल की सराहना करते हुए उनके नए दायित्वों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और जर्मनी रक्षा, व्यापार, तकनीक, हरित ऊर्जा और वैश्विक कूटनीतिक मुद्दों पर लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि फिलिप एकरमैन से विदाई से पहले मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में जर्मन राजदूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जयशंकर ने उनके योगदान की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
भारत-जर्मनी संबंध लगातार हो रहे मजबूत
पिछले कुछ वर्षों में India Germany Relations कई क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। दोनों देश व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जर्मनी की साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।
कौन हैं फिलिप एकरमैन?
फिलिप एकरमैन जर्मनी के वरिष्ठ राजनयिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने बॉन, हीडलबर्ग और उट्रेक्ट विश्वविद्यालयों से कला इतिहास और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। वर्ष 1993 में उन्होंने कला इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और उसी वर्ष जर्मन विदेश सेवा में शामिल हो गए। अपने लंबे कूटनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाई हैं।
भारत से पहले कई अहम पदों पर रहे
फिलिप एकरमैन ने मोरक्को की राजधानी रबात और संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के स्थायी मिशन में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने अफगानिस्तान के कुंदुज में जर्मन पुनर्निर्माण दल का नेतृत्व भी किया। दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2007 से 2010 के बीच वे नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में राजनीतिक सलाहकार भी रह चुके हैं। भारत के राजनीतिक और कूटनीतिक माहौल का उनका अनुभव काफी पुराना रहा है। इसके बाद उन्होंने जर्मन विदेश मंत्रालय में अफगानिस्तान-पाकिस्तान टास्क फोर्स का नेतृत्व किया और बाद में वाशिंगटन स्थित जर्मन दूतावास में उप-मिशन प्रमुख की जिम्मेदारी निभाई। अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में दिए गए एक साक्षात्कार में फिलिप एकरमैन ने कहा था कि भारत और जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी और सतत विकास के क्षेत्र में मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना दो







