POK Long March : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की ओर से रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक निकाले जा रहे लॉन्ग मार्च को लेकर इलाके में हलचल तेज है। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा बलों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग न करें और अधिकतम संयम बरतें। आइए जानते हैं कि पीओके में इस विरोध प्रदर्शन को लेकर क्या स्थिति बनी हुई है।
बातचीत विफल होने के बाद शुरू हुआ मार्च
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन जब कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल सका, तो कमेटी ने फिर से लोगों को सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। तय योजना के मुताबिक, यह लॉन्ग मार्च मीरपुर डिवीजन से शुरू हुआ और रावलकोट में जमा होने के बाद अब मुजफ्फराबाद की ओर आगे बढ़ रहा है।
भारी सुरक्षा बलों की तैनाती से बढ़ा तनाव
यूकेपीएनपी ने रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि इस मार्च को रोकने के लिए इलाके में रेंजर्स, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी (FC) और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी (PC) समेत भारी संख्या में पाकिस्तानी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। संगठन ने चिंता जताई है कि 5 जून से अब तक की अशांति में 40 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने मांग की है कि हर मौत और हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार
यूकेपीएनपी ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की आजादी और बिना हथियारों के इकट्ठा होना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत मौलिक अधिकार हैं। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका और ब्रिटेन सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पीओके के बिगड़े हालात पर नजर रखें और शांतिपूर्ण समाधान के लिए हस्तक्षेप करें। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टिंग करने का आग्रह किया है।






