Bangladesh President Mohammad Shahabuddin resignes: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पांच साल के कार्यकाल के खत्म होने से लगभग दो साल पहले ही शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शहाबुद्दीन को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina का करीबी माना जाता था।
पिछले कुछ दिनों से उनके पद छोड़ने की चर्चाएं काफी गर्म थीं। आखिरकार उन्होंने अपना त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष को भेज दिया है। इस फैसले के पीछे उनकी बिगड़ती सेहत के साथ-साथ हालिया राजनीतिक विवादों को भी मुख्य वजह माना जा रहा है।
सेहत के कारणों का हवाला, लेकिन विवाद भी गहराए
76 वर्षीय Mohammad Shahabuddin ने अपने इस्तीफे की मुख्य वजह अपनी खराब सेहत को बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि वह दिल की बीमारी, डायबिटीज और न्यूरोपैथी जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस वजह से वे राष्ट्रपति जैसे उच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने में असमर्थ महसूस कर रहे थे।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस्तीफे की वजह सिर्फ बीमारी नहीं है। दरअसल, हाल के दिनों में उन पर राजनीतिक दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया था, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया।
लंदन यात्रा और फोन कॉल ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ समय पहले Shahabuddin के London इलाज कराने जाने के दौरान की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में लंदन में इलाज के दौरान उन्होंने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की थी।
जब यह बात सामने आई, तो बांग्लादेश की वर्तमान सरकार और राजनीतिक दलों में हलचल मच गई। बीएनपी के प्रमुख और वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान और शेख हसीना के बीच काफी पुराना राजनीतिक विरोध रहा है। ऐसे में शहाबुद्दीन का यह कदम सरकार को नागवार गुजरा और उन पर पद छोड़ने का नैतिक दबाव बढ़ने लगा।
2024 के घटनाक्रम के बाद भी पद पर बने रहे थे शहाबुद्दीन
1971 के मुक्ति संग्राम में हिस्सा ले चुके और पूर्व जज रहे शहाबुद्दीन अप्रैल 2023 में बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति बने थे। उस समय शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता में थी।
जुलाई-अगस्त 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद जब शेख हसीना की सरकार गिर गई और वे देश छोड़कर भारत चली गईं, तब भी शहाबुद्दीन अपने पद पर बने रहने वाले इकलौते बड़े संवैधानिक चेहरे थे। सत्ता परिवर्तन के बाद भी वे अंतरिम व्यवस्था के तहत काम करते रहे, लेकिन राजनीतिक समीकरण बदलने के कारण उनका कार्यकाल पूरा होना मुश्किल लग रहा था।
संसद अध्यक्ष संभालेंगे कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ के अनुसार, शहाबुद्दीन का इस्तीफा संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) हफीजुद्दीन अहमद ने स्वीकार कर लिया है। बांग्लादेश के संविधान के नियमों के अनुसार, जब तक नया राष्ट्रपति नहीं चुना जाता, तब तक संसद के अध्यक्ष ही कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभालेंगे।
नियमों के तहत अगले 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चूंकि इस समय संसद में BNP का बहुमत है, इसलिए माना जा रहा है कि नया राष्ट्रपति BNP की पसंद का ही चुना जाएगा।







