Jauhar University: 38 इमारतों को गिराने का आदेश, यूनिवर्सिटी प्रबंधन को खुद हटाने के लिए दिया समय

Jauhar University, azam khan

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Jauhar University: उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' को लेकर एक बड़ी खबर आई है। प्रशासन ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने कई भवनों को अवैध घोषित कर दिया है और उन्हें गिराने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अगर यूनिवर्सिटी प्रशासन खुद इन बिल्डिंगों को नहीं हटाता है, तो जल्द ही वहां सरकारी बुलडोजर चलता हुआ दिखाई देगा। आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है और प्रशासन ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया है।

Azam Khan की फिर बढ़ी मुश्किलें

Azam Khan के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने उनके इस बेहद खास प्रोजेक्ट पर एक बड़ा एक्शन लिया है। आरडीए के क्षेत्रीय इंजीनियर ने जून के अंत में एक मामला दर्ज किया था, जिसके बाद मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस भेजा गया था। उनसे पूछा गया था कि परिसर में बनी इमारतों के पास वैध नक्शा है या नहीं। इसके बाद दोनों पक्षों की सुनवाई हुई और आखिरकार प्राधिकरण ने इन निर्माणों को पूरी तरह से नियमों के खिलाफ माना। इस बीच, आचार संहिता उल्लंघन के एक अन्य मामले में भी उनकी अदालती सुनवाई फिलहाल टल गई है।

Jauhar University प्रबंधन को 15 दिनों का वक्त

इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर सीधे जौहर विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने जा रहा है। आरडीए के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि यूनिवर्सिटी परिसर के लगभग 82,309 वर्गमीटर के दायरे में बने कुल 38 भवनों को ढहाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, इनमें एकेडमिक और मेडिकल ब्लॉक को राहत दी गई है, लेकिन बाकी सभी 38 इमारतों को बिना नक्शा पास कराए ही खड़ा कर दिया गया था। प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिनों  दिया है कि वे खुद इन अवैध ढांचों को हटा लें। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो आरडीए (RDA) खुद इन्हें ध्वस्त करेगा और इसका पूरा खर्च भी यूनिवर्सिटी से ही वसूला जाएगा।

इस समय यह मामला यूपी की सबसे बड़ी हलचलों में से एक बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर एक बोर्ड लगाकर करीब 3.30 किलोमीटर लंबी सड़क को आम जनता का रास्ता घोषित कर दिया है। इस सरकारी सड़क को समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बनवाया गया था, जिसे 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा बंद कर दिया गया था।

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