Kukrail Night Safari: सुप्रीम कोर्ट से मिली हरी झंडी, लखनऊ में बनेगा देश का पहला अनोखा जंगल

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Kukrail Night Safari : अगर आप लखनऊ के रहने वाले हैं या फिर घूमने-फिरने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी खबर है। राजधानी लखनऊ में बनने वाली कुकरैल नाइट सफारी (KukrailNightSafari) का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो गया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द जमीन पर काम शुरू हो जाएगा। हालांकि, इसे पूरी तरह से बनकर तैयार होने में कम से कम दो साल का समय लगेगा। यह देश की पहली और दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्साह है।

पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए बनेगा नया टूरिस्ट स्पॉट

चूंकि कुकरैल एक आरक्षित वन क्षेत्र है, इसलिए यहां किसी भी तरह के निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट की इजाजत मिलना बहुत जरूरी था। सरकार ने इसके लिए पिछले साल ही कोर्ट में आवेदन किया था। पर्यावरण पर इसका कोई बुरा असर न पड़े, इसके लिए कोर्ट की एक विशेष समिति (सीईसी) ने जांच की थी। समिति ने कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं, जिन्हें मानने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से भी इसे पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है, जिससे अब काम शुरू करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है।

कोर्ट की शर्तों के साथ बदलेगा प्रोजेक्ट का नक्शा

पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। अब यहां कोई एडवेंचर जोन नहीं बनाया जाएगा ताकि जानवरों को शांति मिल सके। इसके साथ ही, जंगल के अंदर चार लेन की चौड़ी सड़क की जगह सिर्फ दो लेन की सड़क ही बनेगी, जिससे कम से कम पेड़ काटने पड़ें। सबसे बड़ी बात यह है कि नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान यानी लखनऊ के पुराने चिड़ियाघर को अब कुकरैल वन क्षेत्र में शिफ्ट नहीं किया जाएगा, जिससे वहां का प्राकृतिक माहौल बना रहे।

जानवरों की सुरक्षा और लाइटिंग का खास ख्याल

सफारी के अंदर शोर-शराबे और बहुत तेज रोशनी पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। रात के समय जानवरों को परेशानी न हो, इसके लिए बहुत ही हल्की और एनिमल-फ्रेंडली लाइटिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। गाड़ियों की आवाजाही भी सीमित होगी और पर्यटकों के आने का एक तय समय होगा। जंगल के प्राकृतिक नालों और जलधाराओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। हर महीने इसकी जांच के लिए एक विशेष कमेटी बनेगी, जो सरकार और पर्यावरण संस्थाओं को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

लखनऊ को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान

यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 900 एकड़ में फैला होगा और इस पर 1510 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि इस सफारी के 71 फीसदी हिस्से में सिर्फ हरियाली होगी और यहां सौर ऊर्जा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। पर्यटकों के लिए यहां 7डी थिएटर, कैफेटेरिया और एक बड़ा ऑडिटोरियम भी बनाया जा रहा है। सफारी के अंदर घूमने के लिए साढ़े पांच किलोमीटर का ट्रामवे और करीब दो किलोमीटर का पैदल रास्ता होगा, जहां लोग एशियाटिक लायन, बंगाल टाइगर और तेंदुए जैसे जानवरों को रात के माहौल में करीब से देख सकेंगे।

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