Telegram Temporary Ban : अगर आप भी सुबह से अपने फोन में टेलीग्राम ओपन करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐप नहीं चल रहा है, तो परेशान मत होइए। दरअसल, टेलीग्राम पर लगा अस्थायी बैन फिलहाल नहीं हटने वाला है। नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी अफवाहों को रोकने के लिए सरकार ने जो इमरजेंसी कदम उठाया था, उसे अब कानूनी तौर पर भी सही ठहरा दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि देश की इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा के लिए सरकार के पास ऐसे कड़े कदम उठाने का पूरा अधिकार है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि कोर्ट ने क्या कहा और यह पाबंदी आखिर क्यों जरूरी हो गई थी।
परीक्षा की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला
यह पूरा मामला नीट यूजी 2026 परीक्षा की दोबारा होने वाली परीक्षा से जुड़ा हुआ है। 3 मई को हुई मुख्य परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोप लगने के बाद, अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है। इस परीक्षा में करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। सरकार नहीं चाहती थी कि इस बार किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी हो। इसी वजह से सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का आदेश जारी किया था, जिसके खिलाफ टेलीग्राम कंपनी कोर्ट पहुंच गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस करिया की सिंगल-जज बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा को देखते हुए सरकार का यह फैसला बिल्कुल जायज है। कोर्ट ने माना कि हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने कम से कम प्रतिबंधात्मक उपाय को अपनाया है और देशहित में ऐसा करना बेहद जरूरी था।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों चुनौती बना ऐप
केंद्र सरकार ने कोर्ट में बताया कि टेलीग्राम का जो पूरा ढांचा यानी आर्किटेक्चर है, वह जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। इस ऐप पर मिलने वाली गुमनामी (Anonymity) और इसका क्लाउड-बेस्ड सिस्टम अपराधियों को पकड़ने में बड़ी बाधा डालता है। इसके अलावा, नकल माफिया और धोखाधड़ी करने वाले लोग इसके ऑटोमेटेड बॉट्स और बड़े चैनल्स का धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल कर रहे थे।

सरकार का कहना था कि इस प्लेटफॉर्म पर किसी एक ग्रुप या चैनल को डिलीट करने से कोई खास फायदा नहीं हो रहा था। जैसे ही पुलिस एक अवैध चैनल को ब्लॉक करती, नकल माफिया महज कुछ ही मिनटों में नया चैनल और बॉट बनाकर तैयार कर लेते थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की शिकायत पर जब जांच की गई, तो पता चला कि नीट के फर्जी प्रश्न पत्र बेचने वाले संदिग्ध टेलीग्राम चैनलों और बॉट्स की पहुंच करीब 1.46 लाख अकाउंट्स तक हो चुकी थी। जब बार-बार कहने के बाद भी कंटेंट नहीं हटा, तब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत इमरजेंसी ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करना पड़ा।
यूजर्स की दलील और कोर्ट का रुख
दूसरी तरफ, टेलीग्राम का कहना था कि पूरे देश में उसकी सेवाओं को 22 जून तक रोकना और मैसेज एडिटिंग जैसे जरूरी फीचर को 30 जून तक बंद करना कुछ ज़्यादा ही सख्त कदम है। कंपनी की दलील थी कि इस फैसले से उन लाखों आम यूजर्स को परेशानी हो रही है जो इसका इस्तेमाल पढ़ाई, बिजनेस या काम के लिए करते हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने साफ किया कि चूंकि यह पाबंदी हमेशा के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ 22 जून तक एक खास बड़े इवेंट (नीट परीक्षा) को सुरक्षित कराने के लिए लगाई गई है, इसलिए इसे गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता। इसका सीधा मतलब यह है कि 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा के दौरान पूरे भारत में टेलीग्राम की सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी ताकि कोई अफवाह या फर्जी पेपर न फैल सके।
लाखों छात्रों के भविष्य और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गरिमा को बचाए रखने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। भले ही आम यूजर्स को इससे थोड़ी असुविधा हो रही हो, लेकिन परीक्षा को बिना किसी धांधली के संपन्न कराने के लिए यह एक कड़ा और जरूरी कदम है। अब 22 जून के बाद ही ऐप के सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है।
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