Suryavanshi IIM Case Study: अब क्लासरूम में पढ़ाया जाएगा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का ‘सक्सेस मॉडल’ | DD News UP

Suryavanshi IIM Case Study

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Suryavanshi IIM Case Study: अमूमन 15 साल की उम्र में जहां ज्यादातर किशोर दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं, वहीं भारतीय क्रिकेट के नए चमकते सितारे वैभव सूर्यवंशी के टैलेंट को अब देश का सबसे प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान समझने और उस पर शोध करने जा रहा है. आईपीएल (IPL) के एक बेहद धमाकेदार और रिकॉर्ड तोड़ सीजन में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के बाद, यह युवा बल्लेबाज अब एक ऐसे सफर पर है जहां बहुत कम क्रिकेटर पहुंचे हैं. वैभव अब क्रिकेट के मैदान से सीधे भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) इंदौर के क्लासरूम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) का प्रतिनिधित्व करते हुए वैभव ने आईपीएल इतिहास का सबसे आश्चर्यजनक सीजन खेला है, जहां उन्होंने 16 पारियों में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट और 48.50 के औसत से कुल 776 रन कूटे हैं. इस सनसनीखेज यात्रा के दौरान उन्होंने कुल 72 छक्के जड़े, जिसके साथ ही उन्होंने ‘यूनिवर्स बॉस’ क्रिस गेल का 14 साल पुराना 59 छक्कों का वो रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया जिसे अब तक अजेय माना जाता था. इस दमदार प्रदर्शन के बूते उन्होंने ऑरेंज कैप, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन और सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन सहित कुल पांच व्यक्तिगत खिताब अपने नाम किए, जो इस उम्र के खिलाड़ी के लिए अभूतपूर्व है.

रन और छक्कों से आगे ‘मानवीय क्षमता’ को डिकोड करेगा IIM इंदौर

वैभव की इस असाधारण सफलता के पीछे के असली कारणों और उनकी मानसिक दृढ़ता को समझने के लिए IIM इंदौर देश का पहला ऐसा मल्टीडिसीप्लिनरी (बहुविषयक) अकादमिक अध्ययन तैयार कर रहा है जो किसी युवा खेल प्रतिभा पर केंद्रित है. IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु राय ने इस अनूठे प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह अध्ययन केवल रनों, छक्कों या ट्रॉफी तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि यह महज एक उत्कृष्ट क्रिकेट प्रदर्शन की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानवीय क्षमता, प्रतिभा के विकास, व्यक्तिगत अनुशासन, मानसिक मजबूती और निरंतर उत्कृष्टता (Sustained Excellence) से जुड़ा एक जीवंत केस स्टडी है. इस बेहद खास प्रोजेक्ट के लिए खेल विज्ञान (Sports Science), मनोविज्ञान (Psychology) और प्रबंधन (Management) विषयों के शोधकर्ता एक साथ मिलकर काम करेंगे. टीम इस बात का गहन अध्ययन करेगी कि इतनी कम उम्र में असाधारण प्रतिभाएं कैसे उभरती हैं, आगे बढ़ती हैं और खुद को लंबे समय तक शीर्ष पर बनाए रखती हैं.

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सफलता के दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा तंत्र पर रहेगा फोकस

अक्सर देखा गया है कि खेल की दुनिया में कई बाल प्रतिभाएं (चाइल्ड प्रॉडिजी) शुरुआती दौर में तो चमकती हैं, लेकिन बाद में उम्मीदों के भारी बोझ, शोहरत, बेहिसाब दौलत और सोशल मीडिया के दबाव के चलते उनका करियर समय से पहले ही बिखर जाता है. आधुनिक खेल इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होता, बल्कि मानसिक संतुलन और संवेगात्मक लचीलापन (Emotional Resilience) ही खिलाड़ी की लंबी कामयाबी तय करता है. IIM इंदौर की इस स्टडी का एक मुख्य उद्देश्य यह भी खोजना है कि सफलता के चरम पर पहुंचे ऐसे युवा अचीवर्स को मानसिक और भावनात्मक रूप से कैसे सुरक्षित रखा जाए. इस केस स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं की टीम खिलाड़ी के माता-पिता, कोच, सपोर्ट सिस्टम, खेल संस्थानों, व्यक्तिगत अनुशासन और आसपास के माहौल (Environmental Factors) की भूमिका का बारीकी से विश्लेषण करेगी, ताकि महत्वाकांक्षा और मानसिक भलाई (Ambition and Well-being) के बीच के नाजुक संतुलन को समझा जा सके. यह प्रोजेक्ट भारत में खेल और सफलता को देखने के नजरिए में एक बड़े बदलाव को दिखाता है, जहां रिकॉर्ड्स को केवल जश्न का मौका न मानकर सीखने की एक बड़ी यूनिवर्सिटी के रूप में देखा जा रहा है.

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