Barabanki: उत्तर प्रदेश के जेलों को सुधार गृह में बदलने और बंदियों के पुनर्वास (Rehabilitation) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को धरातल पर उतारते हुए Barabanki जिला कारागार से एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। यहां सलाखों के पीछे बंद कैदी अब अपराध का रास्ता छोड़ आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जेल प्रशासन की एक खास पहल के तहत बंदी जेल परिसर के भीतर ही बड़े पैमाने पर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे हैं।
जिला कारागार में चल रहे इस रचनात्मक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को बेहतर कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) देना है, ताकि जब वे सजा काटकर जेल से बाहर निकलें, तो समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक आजीविका कमा सकें।
वर्मी कंपोस्ट (Vermi Compost) से तैयार हो रहीं 100% शुद्ध सब्जियां
जेल परिसर के भीतर हो रही इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है:
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पूरी तरह ऑर्गेनिक: कैदी पूरी तरह से वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) और जैविक तरीकों की मदद से मौसमी और शुद्ध ऑर्गेनिक सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
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सब्जियों की वैरायटी: जेल के खेतों में इस समय लौकी, करेला, भिंडी, तरोई समेत कई तरह की हरी और पौष्टिक सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन सब्जियों का उपयोग जेल के भीतर कैदियों के भोजन के लिए भी किया जा रहा है।
Barabanki जेल अधीक्षक के निर्देशन में बदला कैदियों का स्वभाव
यह पूरा सुधारात्मक अभियान Barabanki के जेल अधीक्षक कुंदन कुमार के कुशल निर्देशन और देखरेख में चलाया जा रहा है। जेल प्रशासन के इस प्रयास का बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके व्यवहार पर बेहद सकारात्मक और जादुई असर देखने को मिल रहा है:
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सकारात्मक बदलाव: दिनभर खेती और बागवानी के रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण बंदियों में डिप्रेशन और नकारात्मक विचार दूर हो रहे हैं।
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भविष्य की तैयारी: कैदियों में अब एक नया आत्मविश्वास पैदा हो रहा है कि वे जेल से रिहा होने के बाद एक कुशल किसान या जैविक खेती के विशेषज्ञ बनकर समाज में सिर उठाकर जी सकेंगे।






