Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद पहला शुक्रवार शांतिपूर्ण लेकिन बेहद संवेदनशील माहौल के बीच संपन्न हुआ। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे धार शहर और परिसर के आस-पास लगभग 1,800 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था, जिसमें आरएएफ (RAF), क्यूआरएफ (QRF) और एसटीएफ (STF) की टुकड़ियां शामिल रहीं।
इस खास मौके पर हिंदू संगठनों ने अदालत के नए दिशा-निर्देशों के तहत परिसर के भीतर भव्य ‘महाआरती’ का आयोजन किया। दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय ने इस फैसले के प्रति अपना शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए भोजशाला परिसर जाने के बजाय अपने-अपने घरों और आंगनों में ही शुक्रवार की नमाज (Juma Namaz) अदा करने का निर्णय लिया।
भारी सुरक्षा व्यवस्था: पुलिस ने किया फ्लैग मार्च
धार के पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल उन्हीं धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति दे रहा है जो माननीय हाई कोर्ट के आदेश के दायरे में आते हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने गुरुवार रात को ही पूरे शहर में फ्लैग मार्च निकाला था। सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है और अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में अतिरिक्त पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं।
वर्षों पुरानी व्यवस्था में बदलाव; हिंदू पक्ष ने कहा- ऐतिहासिक दिन
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बीते 15 मई को अपने फैसले में विवादित ढांचे के धार्मिक स्वरूप को माता सरस्वती का मंदिर (भोजशाला) माना था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह एक संरक्षित स्मारक है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
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2003 की व्यवस्था हुई तब्दील: इस फैसले से पहले, साल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तय की गई व्यवस्था लागू थी। इसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा करने की अनुमति थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज पढ़ने का अधिकार था।
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721 साल बाद ‘शुक्रवार की महाआरती’: भोज उत्सव समिति और हिंदू संगठनों ने इस शुक्रवार के आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि सदियों बाद भोजशाला में शुक्रवार के दिन ‘वाग्देवी महाआरती’ और हनुमान चालीसा का पाठ सामूहिक रूप से किया गया है। श्रद्धालुओं ने नंगे पैर कतारों में लगकर दर्शन किए।
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एएसआई से नई मांगें: हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस से जुड़े याचिकाकर्ताओं ने अब एएसआई (ASI) को पत्र लिखकर परिसर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बंद पड़े एक कमरे को तुरंत खोलने की मांग की है। उनका दावा है कि यह मूल मंदिर का हिस्सा है।
Dhar Bhojshala पर मुस्लिम पक्ष का रुख: संवैधानिक दायरे में शांतिपूर्ण विरोध
अदालत के फैसले से असहमत मुस्लिम याचिकाकर्ताओं ने कानून-व्यवस्था को हाथ में न लेते हुए पूरी तरह संवैधानिक सीमाओं के भीतर अपनी बात रखने का फैसला किया है।
प्रतिनिधियों का वक्तव्य: मौलाना कमाल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने बताया कि समुदाय के लोगों ने विरोध स्वरूप काली पट्टियां बांधीं, अपनी दुकानें बंद रखीं और सामूहिक रूप से घरों में नमाज पढ़कर उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने कहा, “संविधान हमें पूजा और इबादत का अधिकार देता है। हम पूरी तरह संविधान का पालन करेंगे और किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन अपनी मस्जिदों के लिए शांतिपूर्ण आवाज उठाते रहेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: इस बीच, मुस्लिम पक्ष की ओर से काजी मोइनुद्दीन ने हाई कोर्ट के 15 मई के उस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती दे दी है, जिसमें इस ढांचे को हिंदू मंदिर घोषित किया गया था। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं का भी मानना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस विधिक लड़ाई को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
फिलहाल, शुक्रवार शाम तक पूरे धार जिले में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांतिपूर्ण बनी रही, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से अब देश की शीर्ष अदालत में होने वाली अगली कानूनी जंग की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।







