भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh इस समय दक्षिण कोरिया के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सियोल में राजनाथ सिंह और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष आन ग्यू बैक के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा साइबरस्पेस क्षेत्र और सैन्य प्रशिक्षण में आपसी सहयोग बढ़ाने को लेकर कुछ बड़े समझौते किए गए हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की और एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस संबोधन में उन्होंने भारत की परमाणु नीति को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।
न्यूक्लियर ब्लैकमेल कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने साफ कहा कि आज का भारत पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा, “एक समय था जब दुनिया भारत को सिर्फ एक सॉफ्ट पावर यानी सीधे-सरल देश के रूप में देखती थी, लेकिन आज पूरी दुनिया भारत को वैश्विक समस्याओं का समाधान देने वाली एक बड़ी शक्ति के रूप में मानती है।”
Rajnath Singh ने भारत की परमाणु हमले की पॉलिसी का जिक्र करते हुए आगे कहा कि भारत हमेशा से एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति रहा है और हम अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने) की नीति पर पूरी तरह से कायम हैं। हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हमेशा इस बात का सम्मान किया है। लेकिन कुछ ताकतें हमारे इस संयम और शांतिप्रिय व्यवहार को हमारी कमजोरी समझने की बहुत बड़ी भूल कर बैठती हैं। मैं यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूँ कि भारत भले ही अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ की नीति के प्रति पूरी तरह कमिटेड है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि देश किसी भी तरह के न्यूक्लियर ब्लैकमेल को बर्दाश्त करेगा। हम इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सक्षम हैं।
भारत की नीति रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव
देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारी सरकार के दौरान रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। अब भारत की रक्षा नीति केवल किसी घटना पर रिएक्ट करने (प्रतिक्रिया देने) तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी नीति अब प्रोएक्टिव हो चुकी है, यानी हम खतरों को भांपकर पहले से ही मुस्तैद रहते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर और किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी मजबूत संकल्प के साथ आज भारत अपने स्वदेशी रक्षा निर्माण को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और देश में सोशल जस्टिस को एक नई गति दी है। पिछले 12 सालों में देश के भीतर जो यह बड़ा बदलाव (ट्रांसफॉर्मेशन) आया है, उसने हर नागरिक के इस विश्वास को और मजबूत कर दिया है कि भारत अब तेजी से एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh की यह दक्षिण कोरिया यात्रा न केवल रक्षा साइबरस्पेस और सैन्य सहयोग के लिहाज से ऐतिहासिक रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच से दिया गया उनका यह बयान भारत के दुश्मनों को भी एक कड़ा संदेश है। ‘नो फर्स्ट यूज’ की नीति पर कायम रहते हुए न्यूक्लियर ब्लैकमेल को कतई बर्दाश्त न करने की बात कहकर भारत ने साफ कर दिया है कि वह शांति तो चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
