अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत के विदेशी संबंधों को लेकर आज एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh सोमवार, 18 मई से अपने चार दिवसीय आधिकारिक विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस खास दौरे में वे वियतनाम और दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे, जिसका मुख्य मकसद एशिया-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। आइए जानते हैं रक्षा मंत्री के इस अहम दौरे का पूरा शेड्यूल और इसके मायने।
वियतनाम से शुरू होगी द्विपक्षीय वार्ता
रक्षा मंत्री Rajnath Singh के इस दौरे का पहला पड़ाव वियतनाम है, जहां वे 18 और 19 मई को रहेंगे। यह यात्रा भारत और वियतनाम की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे होने के मौके पर हो रही है। अपनी इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ मिलकर दोनों देशों के सैन्य सहयोग और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे वियतनाम के महान नेता हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती पर उनके समाधि स्थल जाकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।
दक्षिण कोरिया में पुराने रिश्तों को मिलेगी नई धार
दौरे के दूसरे चरण में रक्षा मंत्री 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रहेंगे। वहां वे अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष आहन ग्यु-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने और इंडिया-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करने का भी कार्यक्रम है। इस यात्रा में ऐतिहासिक पलों को भी याद किया जाएगा, जब कोरियाई युद्ध के समय भारत की ’60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट’ ने लाखों घायल मरीजों की मदद की थी। साथ ही 21 मई को वहां एक नए भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन भी किया जाएगा।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh का यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ को एक मंच पर लाने का बड़ा प्रयास है। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे मजबूत देशों के साथ रक्षा और समुद्री सहयोग बढ़ाने से न केवल भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि इस पूरे समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।







