आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं जो सीधे तौर पर हमारे भविष्य, हमारी जेब और पूरी दुनिया की स्थिरता से जुड़ा हुआ है। इस समय दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव और युद्ध का माहौल है। रूस-यूक्रेन संकट के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक स्तर पर कई बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन सब के बीच, PM Modi ने एक बेहद गंभीर चेतावनी दी है और देश के नागरिकों से कुछ खास बदलाव करने का आग्रह किया है। चलिए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसका हम पर क्या असर पड़ने वाला है।
बढ़ती आपदाओं का दौर और गरीबी का खतरा
अपने पांच देशों के दौरे के अगले चरण में जब प्रधानमंत्री नीदरलैंड्स पहुंचे, तो उन्होंने वहां रह रहे भारतीय समुदाय से खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि यह दशक पूरी मानवता के लिए बड़ी चुनौतियों का समय रहा है। पहले हम सबने कोरोना महामारी का सामना किया और अब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं।
पीएम ने आगाह किया कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन बिगड़ते हालातों को जल्दी नहीं सुधारा गया, तो पिछले कई दशकों में दुनिया ने जो तरक्की की है, जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे सब खत्म हो सकती हैं। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बिगड़ने से दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी दोबारा गरीबी के दलदल में धंस सकती है। ईंधन की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन का टूटना हर आम इंसान के जीवन को मुश्किल बना रहा है।
खाड़ी देशों में तनाव और तेल सप्लाई पर संकट
दुनिया अभी रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष से संभल भी नहीं पाई थी कि अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुए तनाव ने वैश्विक स्तर पर नया संकट खड़ा कर दिया है। हालांकि लगभग 40 दिनों की खींचतान के बाद फिलहाल ईरान में शांति दिखाई दे रही है, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।
इस रास्ते से दुनिया की एक बहुत बड़ी तेल सप्लाई गुजरती है। इसके प्रभावित होने की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट लगातार गहराता जा रहा है। समस्या तब और जटिल हो जाती है जब दोनों ही पक्ष खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग का सामान्य होना फिलहाल आसान नहीं लग रहा है। इसका सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ रहा है।
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देश की भलाई के लिए नागरिकों से तीन जरूरी अपील
इस गहरे होते ऊर्जा संकट को देखते हुए सरकार ने देश के भीतर भी एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करने का आग्रह किया। उन्होंने इन बदलावों को सीधे तौर पर देश की आर्थिक सुरक्षा और देशभक्ति से जोड़ा।
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सोना खरीदने की आदत पर रोक: हमारे देश में सोने को लेकर पारंपरिक रूप से एक अलग ही लगाव देखा जाता है। शादियों से लेकर त्योहारों तक लोग सोना खरीदना पसंद करते हैं। लेकिन सच यह है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना बाहर से आयात करता है। इसके लिए हमें भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। पीएम ने अपील की है कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए नागरिक अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें। इसी कदम को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने सोने के आयात पर ड्यूटी भी बढ़ा दी है।
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ईंधन और ऊर्जा की बचत पर ध्यान: तेल और गैस के मामले में भी हमारी निर्भरता बाहरी देशों पर बहुत ज्यादा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ते हैं, देश का बजट प्रभावित होता है। पीएम ने लोगों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कोविड के समय का उदाहरण देते हुए कंपनियों और कर्मचारियों से एक बार फिर जहां संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने की दिनचर्या अपनाने की बात कही। इसके साथ ही घरेलू बाजार में तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में भी कुछ बढ़ोतरी की है ताकि खपत को नियंत्रित किया जा सके।
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विदेशी यात्राओं को फिलहाल टालना: विदेशी मुद्रा बचाने की मुहिम के तहत प्रधानमंत्री ने लोगों से अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के बजाय अपने देश के भीतर ही पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही। भारत में घूमने-फिरने के लिए बहुत सी खूबसूरत और ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं। अगर लोग विदेश जाने के बजाय देश के भीतर ही घूमेंगे, तो इससे हमारा पैसा देश के ही काम आएगा और विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर में हमें केवल उतनी ही चीजों का उपयोग करना चाहिए जितनी बेहद जरूरी हों।
आने वाले समय की चुनौतियां
वैश्विक स्थिति को देखें तो अमेरिका और ईरान के बीच अभी तक कोई स्थाई समझौता होता नजर नहीं आ रहा है। वाशिंगटन की तरफ से लगातार सख्त संकेत मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ तेहरान ने भी साफ कर दिया है कि यदि कोई नया हमला होता है, तो उसका पलटवार पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा। अगर यह तनाव दोबारा बड़े संघर्ष में बदलता है, तो इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।







