जिंदगी की जंग हार गए गोरखपुर के DIOS डॉ. अमरकांत सिंह, लखनऊ में निधन

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गोरखपुर के DIOS डॉ. अमरकांत सिंह का लखनऊ में निधन। लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शिक्षा विभाग में शोक की लहर, कर्मठ अधिकारी के रूप में याद किए गए।

Dr. Amarkant Singh, जो Gorakhpur में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के पद पर तैनात थे, शनिवार को Lucknow के एक अस्पताल में जीवन की जंग हार गए। लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे डॉ. सिंह के निधन की खबर मिलते ही पूरे शिक्षा विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी स्तब्ध रह गए।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन की झलक

डॉ. अमरकांत सिंह अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनकी बेटी एमबीए कर चुकी हैं और अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संचालित करती हैं। बचपन से मेधावी रही उनकी बेटी को शासन की ओर से कई देशों की यात्रा का अवसर भी मिला था।

प्रमोशन से पहले ही बुझ गया जीवन का दीप

मूल रूप से Azamgarh के निवासी डॉ. सिंह का जून माह में प्रमोशन प्रस्तावित था, जबकि वर्ष 2029 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी। उनके पिता वेदपाल सिंह प्राथमिक शिक्षक संघ में जिला मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में संगठन के संरक्षक हैं। परिवार में चार भाइयों में डॉ. अमरकांत सिंह बीच के थे, जबकि उनके भाई सूर्यकांत सिंह Sitapur में जिला अल्पसंख्यक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

कई जिलों में दी सेवाएं, मजबूत प्रशासनिक पहचान

डॉ. सिंह ने DIOS बनने से पहले Lucknow, Bareilly, Lakhimpur Kheri और Mainpuri में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के रूप में कार्य किया। एक समय निलंबन की कार्रवाई का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से फिर मजबूत पहचान बनाई।

शोकसभा में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

Gorakhpur स्थित DIOS कार्यालय परिसर में प्रभारी डीआईओएस अजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में शोकसभा आयोजित की गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके योगदान को याद किया।

काम के प्रति समर्पण की मिसाल

डॉ. अमरकांत सिंह अपनी कार्यशैली और अनुशासन के लिए जाने जाते थे। बीमारी के दौरान भी वे रोजाना कार्य की जानकारी लेते थे और छात्रों के पंजीकरण अभियान पर विशेष नजर रखते थे। उनके नेतृत्व में गोरखपुर में शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ और कई महत्वपूर्ण अभियानों में जिला शीर्ष स्थान पर रहा।

बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार

अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े दागी केंद्रों की परंपरा को समाप्त कर दिया। उनके प्रयासों से एक भी परीक्षा केंद्र संदिग्ध घोषित नहीं हुआ, जो उनकी प्रशासनिक क्षमता का बड़ा उदाहरण है।

संवेदनशील अधिकारी के रूप में पहचान

मृतक आश्रित मामलों के प्रति उनकी संवेदनशीलता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने निर्देश दिए थे कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की देरी न हो और फाइलों का तत्काल निस्तारण किया जाए। उनके कार्यकाल में लंबित फाइलों को तेजी से निपटाया गया और बाबूशाही पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया।

शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति

डॉ. अमरकांत सिंह के निधन को शिक्षा विभाग ने एक बड़ी और अपूरणीय क्षति बताया है। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने उन्हें कर्मनिष्ठ, अनुशासनप्रिय और संवेदनशील अधिकारी बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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