उत्तर प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। लखनऊ और वाराणसी समेत कई जिलों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गुरुवार को वाराणसी में पारा 43.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे वातावरण मानो आग की भट्ठी में तब्दील हो गया। सूरज की तीखी किरणों ने सुबह से ही असर दिखाना शुरू कर दिया था। सुबह 10 बजे के बाद ही धूप इतनी तेज हो गई कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया। दोपहर ढाई बजे के आसपास बीएचयू क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर 24.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वाराणसी लगातार छठे दिन 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान झेल रहा है। इसी के साथ यह प्रदेश में तीसरा सबसे गर्म शहर और पूरे देश में छठे स्थान पर दर्ज किया गया। दिलचस्प बात यह रही कि बनारस का तापमान राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र जैसलमेर से भी अधिक रहा, जो गर्मी की भयावहता को दर्शाता है।
प्रदेश में प्रयागराज 44.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म शहर रहा, जबकि सुल्तानपुर 43.8 डिग्री सेल्सियस के साथ दूसरे स्थान पर रहा। पूरे देश में राजस्थान का श्रीगंगानगर 44.5 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। इसके बाद प्रयागराज और अमरावती दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अकोला, भटिंडा और राजनांदगांव में भी तापमान 44 डिग्री के आसपास रहा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी राहत की कोई उम्मीद नहीं है। पूर्वानुमान के मुताबिक रविवार तक गर्मी और लू का असर इसी तरह बना रहेगा। आर्द्रता में मामूली वृद्धि जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। बीते छह दिनों के तापमान पर नजर डालें तो 18 अप्रैल को 43 डिग्री, 19 अप्रैल को 44.2 डिग्री, 20 अप्रैल को 44 डिग्री, 21 अप्रैल को 42.4 डिग्री, 22 अप्रैल को 43.1 डिग्री और 23 अप्रैल को 43.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। भीषण गर्मी के चलते आम जनजीवन प्रभावित है और लोग दिन के समय घरों से निकलने से बच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों को सतर्क रहने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।







