बाबा केदार के दर पर गूंजा ‘हर-हर महादेव’, शुरू हुई चारधाम यात्रा
इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं और बाबा केदारनाथ के भक्तों के लिए एक बड़ा दिन आ गया। चारधाम यात्रा के चौथे दिन, बुधवार सुबह ठीक 8 बजे Kedarnath Dham के कपाट पूरी विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। पहाड़ों की ठंडी हवाओं के बीच जब मंदिर के द्वार खुले, तो भक्तों का उत्साह देखने लायक था। परंपरा के मुताबिक, सबसे पहले मंदिर के पूर्व द्वार को खोला गया। इसके बाद मुख्य पुजारी, रावल और हक-हकूकधारियों ने मंदिर के भीतर प्रवेश कर पूजा-अर्चना की।

सबसे खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस मौके पर मौजूद थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली पूजा संपन्न कराई। अब आम श्रद्धालु भी बाबा के दर्शन कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पावन क्षण में संकल्प लेकर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम से बाबा केदार की प्रथम पूजा-अर्चना की तथा विधि-विधान से अभिषेक कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की।
इस पावन क्षण में संकल्प लेकर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नाम से बाबा केदार की प्रथम पूजा-अर्चना की तथा विधि-विधान से अभिषेक कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की। pic.twitter.com/hSch2tsCEE
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 22, 2026
ज्योतिर्लिंग से हटाई गई ‘भस्म’ और मिला प्रसाद
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया बहुत ही आध्यात्मिक होती है। पिछले साल जब कपाट बंद हुए थे, तब ज्योतिर्लिंग पर भस्म लगाई गई थी। सुबह पूजा के दौरान उस भस्म को हटाया गया और वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटा गया। भक्तों के लिए यह पल बेहद भावुक और आस्था से भरा था।

बाबा को भोग क्यों नहीं लगेगा?
अक्सर लोग सोचते हैं कि कपाट खुलते ही भगवान को भोग लगाया जाता होगा, लेकिन केदारनाथ में एक अनोखी परंपरा है। पहले दिन बाबा केदार को भोग नहीं लगाया गया। दरअसल, नियम यह है कि जब तक भैरवनाथ मंदिर के कपाट नहीं खुलते, तब तक मुख्य मंदिर में भोग शुरू नहीं होता।
भैरवनाथ जी को केदारनाथ धाम का ‘क्षेत्र रक्षक’ माना जाता है। इस साल भैरव मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को खुलेंगे। उसी दिन के बाद बाबा केदारनाथ को पीले चावलों का भोग लगना शुरू होगा। मान्यता है कि बाबा के दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाते, जब तक आप भुकुंड भैरव के दर्शन न कर लें। यह मंदिर केदारनाथ से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।
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केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने X पर लिखा- कपाट खुल गए.. भोलेनाथ की कृपा सब पर बनी रहे
महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं, सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे॥श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। यह अतिशुभ और पावन अवसर आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का देशभर में संचार कर रहा है।
भगवान भोलेनाथ की कृपा… pic.twitter.com/cdEEigrsb1
— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) April 22, 2026
यात्रा के दौरान इन नियमों का रखें खास ध्यान
अगर आप इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, तो कुछ नियमों को जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। इस साल प्रशासन और मंदिर समिति काफी सख्त है:
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मोबाइल पर पाबंदी: मंदिर परिसर के 50 से 60 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह मना है।
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रील और फोटोग्राफी: मुख्य मंदिर के अंदर या उसके ठीक पास वीडियो बनाना या रील बनाना बैन है। अगर आप फोटो खींचना चाहते हैं, तो धाम में इसके लिए अलग से जगह तय की गई है।
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हेली सेवा: डीजीसीए (DGCA) नियमों को लेकर काफी मुस्तैद है। हालांकि बुधवार को कुछ समय के लिए फाटा और गुप्तकाशी की हेली सेवाओं पर रोक लगी थी, लेकिन जांच के बाद इसे हटा दिया गया है।
प्रधानमंत्री का संदेश और नई सुविधाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने एक पत्र लिखकर बताया कि कैसे केदारनाथ और बद्रीनाथ में पुनर्निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। अब यात्रियों के लिए बैठने की बेहतर जगह, चौड़ी सड़कें और अच्छी मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं। पीएम ने कहा कि ये धाम केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि हमारी विरासत के प्रतीक हैं।
देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं।
केदारनाथ धाम और चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी… pic.twitter.com/BYQItBsZi4
— Narendra Modi (@narendramodi) April 22, 2026
चारधाम यात्रा आस्था का वो सफर है जो हर भारतीय के दिल के करीब है। केदारनाथ के कपाट खुलना इस यात्रा का एक मुख्य पड़ाव है। अगर आप भी जाने का मन बना रहे हैं, तो स्थानीय नियमों का पालन जरूर करें और प्रकृति का सम्मान करते हुए अपनी यात्रा पूरी करें। बाबा केदार और बद्री विशाल की कृपा आप सभी पर बनी रहे!
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