Israel-Lebanon संघर्ष: क्या युद्धविराम से पहले ही बढ़ जाएगा तनाव?

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Israel-Lebanon: पिछले कुछ दिनों से पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिकी थीं। सबको उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जो दो हफ्ते के युद्धविराम की बात चल रही है, उससे शायद मासूमों की जान बचना शुरू हो जाएगी और हालात थोड़े शांत होंगे। लेकिन अफसोस, जिस दिन शांति की उम्मीद जगी, उसी दिन माहौल और ज्यादा बिगड़ गया। इज़रायल ने Lebanon पर एक ऐसा हमला बोल दिया जिसने सबको चौंका कर रख दिया है।

आखिर उस दिन क्या हुआ?

जब दुनिया युद्धविराम की घोषणा का स्वागत कर रही थी, ठीक उसी वक्त इज़रायली सेना ने Lebanon के रिहायशी इलाकों और हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया। यह कोई छोटा-मोटा हमला नहीं था। महज 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा हवाई हमले किए गए। इसमें 50 से अधिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल हुआ, जिसने बेरूत से लेकर दक्षिणी हिस्सों तक तबाही मचा दी।

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आम लोगों पर क्या बीत रही है?

इस पूरे संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है। Lebanon के लिए यह दिन अब तक का सबसे काला और जानलेवा दिन साबित हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो 250 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और घायलों की संख्या 1100 के पार पहुँच गई है। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने का काम अभी भी जारी है, जिससे डर है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। वहां के राष्ट्रपति ने तो इसे सीधे तौर पर एक ‘नरसंहार’ करार दिया है।

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युद्धविराम की शर्तों पर मतभेद

यहाँ सबसे बड़ी उलझन यह है कि आखिर इस युद्धविराम के दायरे में कौन-कौन आता है? इज़रायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनके लिए Lebanon इस समझौते का हिस्सा नहीं है। उनका कहना है कि वे हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे। दूसरी तरफ, ईरान का रुख एकदम अलग है। ईरान का मानना है कि Lebanon भी इस 10-पॉइंट प्लान का हिस्सा है और उस पर हमला करना सीधे तौर पर समझौते का उल्लंघन है।

ईरान की जवाबी धमकी

इस हमले के बाद माहौल इतना गरमा गया है कि ईरान ने अब सख्त कदम उठाने की बात कही है। खबर आ रही है कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जो वैश्विक व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। ईरान की तरफ से यह चेतावनी भी आई है कि अगर Lebanon पर हमले नहीं रुके, तो वह युद्धविराम से पूरी तरह पीछे हट जाएगा।

वैश्विक नेताओं की चिंता

इस बढ़ती हिंसा को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई वैश्विक नेताओं ने शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर समझौते का सम्मान नहीं किया गया, तो कूटनीति के जरिए शांति लाने की कोशिशें बेकार हो जाएंगी। फिलहाल Lebanon की स्थिति को देखकर तो यही लगता है कि शांति की राह अभी बहुत कठिन है।

देखा जाए तो युद्ध चाहे कहीं भी हो, कीमत आम इंसान को ही चुकानी पड़ती है। इज़रायल और Lebanon के बीच बढ़ती यह आक्रामकता न केवल इस क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा है। अब देखना यह होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव इज़रायल को रोकने में कामयाब होता है या यह युद्धविराम शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा। Lebanon के लोग फिलहाल इसी डर के साये में जी रहे हैं।

यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान के बीच Ceasefire पर बनी सहमति: क्या पश्चिम एशिया में थमेगा बारूद का शोर?

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