भारतीय संस्कृति और प्राचीन विज्ञान के अद्भुत संगम के रूप में Varanasi Vedik Ghadi अब काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक की शोभा बढ़ा रही है। उज्जैन के महाकाल लोक में विश्व की पहली वैदिक घड़ी की सफलता के बाद, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इसे अब वाराणसी में भी स्थापित कर दिया गया है। 3 अप्रैल 2026 को वाराणसी में आयोजित महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' के दौरान यह अनूठी घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की गई थी, जिसे अब विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ चालू कर दिया गया है।
डिजिटल तकनीक और पंचांग का संगम
Varanasi Vedik Ghadi लगभग दस फीट ऊंची एक आयताकार डिजिटल घड़ी है, जो पूरी तरह से हिंदू नववर्ष और वैदिक रीति-रिवाजों पर आधारित है। यह घड़ी प्रचलित समय (IST) के साथ-साथ सूर्योदय पर आधारित भारतीय काल गणना को दर्शाती है। सामान्य घड़ियों के विपरीत, यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसके माध्यम से भक्त न केवल समय, बल्कि वर्तमान तिथि, नक्षत्र, योग, भद्रा और ग्रहों की सटीक स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस
इस Varanasi Vedik Ghadi की तकनीक बेहद उन्नत है। यह घड़ी एक विशेष मोबाइल ऐप से जुड़ी है जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें 7,000 वर्षों से अधिक के पंचांग का डेटा फीड किया गया है, जो शोधकर्ताओं और ज्योतिष प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। घड़ी के डिस्प्ले पर समय के साथ-साथ शहर का वर्तमान तापमान, हवा की गति और नमी (Humidity) भी प्रदर्शित होती है। इसके बैकग्राउंड में हर घंटे विश्व के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की भव्य तस्वीरें बदलती रहती हैं, जो मंदिर चौक आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा विकसित यह Varanasi Vedik Ghadi प्राचीन भारतीय काल गणना पद्धति को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त माध्यम है। काशी के बाद अब सरकार की योजना इसे देश के अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख मंदिरों तक पहुँचाने की है। यह घड़ी नई पीढ़ी को यह बताने का कार्य कर रही है कि भारतीय समय गणना कितनी वैज्ञानिक और सटीक रही है।
Varanasi Vedik Ghadi का काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित होना केवल समय बताने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपराओं के गौरव को आधुनिक युग में पुनर्स्थापित करने का प्रतीक है। काशी आने वाले करोड़ों शिव भक्त अब बाबा के दर्शन के साथ-साथ इस वैदिक विज्ञान का भी अनुभव कर सकेंगे।
यह भी पढ़ें: Agra Fire News: रबर फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड, 6 घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू