Varanasi: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी इन दिनों एक अद्भुत ऐतिहासिक गौरव की गवाह बन रही है। ‘विक्रमोत्सव-2026’ के तहत उज्जैन के महान चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, वीरता और न्यायप्रियता की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वाराणसी में Samrat Vikramaditya Mahanatya का भव्य आगाज़ हो चुका है। शुक्रवार की शाम जब बीएलडब्ल्यू (BLW) स्थित सूर्य सरोवर के सामने विशाल मैदान में शंखनाद हुआ, तो ऐसा लगा मानो सदियों पुराना इतिहास जीवंत होकर दर्शकों के सामने खड़ा हो गया हो।
इस तीन दिवसीय महानाट्य का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलन कर किया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक मिलन का एक बड़ा प्रतीक भी बनकर उभरा है।
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तीन विशाल मंचों पर दिखा अद्भुत संगम
Samrat Vikramaditya Mahanatya की सबसे बड़ी विशेषता इसका भव्य और आधुनिक तकनीकी वाला मंचन है। आमतौर पर नाटक एक ही मंच पर होते हैं, लेकिन यहाँ एक साथ तीन विशाल मंच तैयार किए गए हैं। इन तीनों मंचों पर समांतर रूप से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को दिखाया गया। कहीं उनके बचपन की शिक्षा-दीक्षा चल रही थी, तो कहीं उनके पराक्रम और युद्ध कौशल का प्रदर्शन।
दृश्य इतनी खूबसूरती से बुने गए थे कि दर्शकों की नजरें एक पल के लिए भी नहीं भटक रही थीं। महाकाल की भस्म आरती के दृश्यों और पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे माहौल को भक्तिमय और गौरवशाली बना दिया। यह दृश्यांकन इतना सजीव था कि वहां मौजूद हजारों लोग खुद को उज्जैन के उस प्राचीन वैभवशाली कालखंड का हिस्सा महसूस कर रहे थे।
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225 कलाकार और असली हाथी-घोड़ों का रोमांच
मंच पर जब इतिहास उतरता है, तो उसकी भव्यता कलाकारों और संसाधनों पर टिकी होती है। Samrat Vikramaditya Mahanatya में लगभग 225 कुशल कलाकारों ने हिस्सा लिया। इन कलाकारों ने अपने सशक्त संवादों और शारीरिक अभिनय से सम्राट विक्रमादित्य के चरित्र को फिर से जीवित कर दिया। लेकिन असली रोमांच तब बढ़ा जब मंच पर 18 घोड़े, 4 ऊंट, 2 रथ और एक विशालकाय गजराज (हाथी) की एंट्री हुई।
जैसे ही युद्ध के दृश्यों में घोड़े सरपट दौड़ते हुए निकले और उनकी टापों की आवाज मैदान में गूंजी, दर्शकों के भीतर रोमांच की लहर दौड़ गई। हाथियों की गरिमामयी चाल और प्राचीन युद्ध शैली के दृश्यों ने यह अहसास कराया कि भारतीय सेनाएं प्राचीन काल में कितनी शक्तिशाली हुआ करती थीं। प्रकाश व्यवस्था (Lighting) और ध्वनि प्रभाव (Sound Effects) इतने सटीक थे कि हर छोटा-बड़ा दृश्य दर्शकों के दिल में उतर रहा था।
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सीएम योगी को भेंट की गई 700 किलो की वैदिक घड़ी
इस उद्घाटन अवसर पर एक और ऐतिहासिक लम्हा तब आया जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का स्वागत पुष्प गुच्छ और धर्म पट्टिका देकर किया। इसके साथ ही, उन्होंने उपहार स्वरूप 700 किलोग्राम वजन वाली ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ भेंट की। यह कोई साधारण घड़ी नहीं है, बल्कि भारतीय काल गणना की प्रतीक है। बताया गया कि इस विशाल घड़ी को शनिवार के दिन श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा, जो आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में Samrat Vikramaditya Mahanatya की सराहना करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन उस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब इतिहास के खलनायकों को नायक बनाकर पेश किया गया, जिससे पीढ़ियों पर बुरा असर पड़ा, लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपने वास्तविक नायकों का सम्मान करें।
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सुशासन और न्याय का संदेश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिनकी परिकल्पना से यह Samrat Vikramaditya Mahanatya तैयार हुआ है, उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को न्याय और पराक्रम का पर्याय बताया। उन्होंने कहा कि माँ गंगा के किनारे सम्राट विक्रमादित्य की कीर्ति का गान करना अपने आप में सौभाग्य की बात है। उन्होंने भगवान राम-लक्ष्मण, कृष्ण-बलराम की तरह ही भर्तृहरि और विक्रमादित्य की जोड़ी का जिक्र करते हुए भारतीय मूल्यों को रेखांकित किया।
यह आयोजन इस बात का भी प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अब एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। चाहे वह बेतवा नदी को जोड़ने का कार्य हो या सांस्कृतिक आदान-प्रदान, दोनों राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ा रहे हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत
वाराणसी में हो रहे इस Samrat Vikramaditya Mahanatya को देखने के लिए युवाओं और छात्रों की भारी भीड़ उमड़ रही है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे पश्चिमी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहां सम्राट विक्रमादित्य जैसे महान भारतीय शासक की कहानी उन्हें अपनी जड़ों की ओर वापस ला रही है। महानाट्य में दिखाया गया कि कैसे एक राजा अपनी प्रजा के दुख-दर्द को अपना समझता था और न्याय के लिए सिंहासन छोड़ने को भी तैयार रहता था।
काशी में आयोजित Samrat Vikramaditya Mahanatya केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय गौरव का एक उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा इतिहास केवल हार और गुलामी का नहीं, बल्कि जीत, न्याय और महानता का रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव निश्चित रूप से काशीवासियों के मन पर एक अमिट छाप छोड़ जाएगा।
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