भारतीय शिक्षा जगत के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT को अब 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा मिल गया है। यह फैसला कोई रातों-रात नहीं लिया गया, बल्कि इसके लिए पिछले तीन सालों से प्रक्रिया चल रही थी। शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद NCERT अब सिर्फ स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हायर एजुकेशन (उच्च शिक्षा) के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
पांच राज्यों के संस्थानों को मिलेगी नई पहचान
शिक्षा मंत्रालय का यह ऐतिहासिक फैसला केवल दिल्ली स्थित NCERT मुख्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत आने वाले देश के छह प्रमुख संस्थानों पर भी लागू होगा। इनमें अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग के ‘रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन’ (RIE) शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन भी अब इस दायरे में आएगा।
अभी तक ये सभी संस्थान अलग-अलग राज्यों की यूनिवर्सिटीज से संबद्ध (Affiliated) थे। जैसे भोपाल वाला संस्थान बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से और अजमेर वाला एमडीएस विश्वविद्यालय से जुड़ा था। इस वजह से इन्हें कोई भी नया कोर्स शुरू करने या डिग्री देने के लिए उन विश्वविद्यालयों की अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन अब NCERT खुद एक यूनिवर्सिटी की तरह काम करेगी, जिससे इन संस्थानों को प्रशासनिक और शैक्षणिक आजादी मिलेगी।
यूजीसी के मानकों पर खरी उतरेगी NCERT
भले ही NCERT को अब डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह पूरी तरह स्वतंत्र होगी। नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि NCERT को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियामक ढांचे के भीतर ही काम करना होगा। यानी इसके सभी शैक्षणिक प्रोग्राम और कोर्सेज यूजीसी द्वारा तय किए गए मानदंडों और मानकों के अनुसार ही होंगे।
अगर काउंसिल को भविष्य में कोई नया ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेश में कोई ब्रांच खोलनी है, तो उसके लिए भी यूजीसी के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
रैंकिंग और पारदर्शिता पर रहेगा जोर
एक यूनिवर्सिटी बनने के बाद अब NCERT की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब काउंसिल को ‘नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क’ (NIRF) में हिस्सा लेना होगा। यानी अब देश की टॉप यूनिवर्सिटीज की रेस में NCERT भी शामिल होगी। इसके साथ ही इसे ‘नैक’ (NAAC) और ‘एनबीए’ (NBA) जैसी संस्थाओं से मान्यता भी प्राप्त करनी होगी।
डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, अब ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) जैसे सिस्टम को भी लागू करना होगा। इससे छात्रों को अपने क्रेडिट स्कोर ट्रांसफर करने में आसानी होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि नोटिफिकेशन में सख्त हिदायत दी गई है कि संस्था किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होगी जो कमर्शियल या मुनाफा कमाने वाली हो। सरकारी धन का उपयोग पूरी तरह से शिक्षा के विकास के लिए ही किया जाएगा।
छात्रों और शिक्षकों को क्या होगा फायदा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बदलाव से आम छात्रों को क्या मिलेगा? दरअसल, NCERT अब खुद के डिग्री और पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू कर सकेगी। शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) के क्षेत्र में अनुभव बहुत पुराना और गहरा है, अब वे इस क्षेत्र में नए रिसर्च आधारित कोर्स ला सकेंगे। इससे न केवल शिक्षकों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि स्कूली शिक्षा के लिए नए और आधुनिक करिकुलम तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलना भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे शिक्षा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। अब जब काउंसिल के पास खुद फैसले लेने की ताकत होगी, तो उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में देश के छात्रों को विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा और शोध के अवसर प्राप्त होंगे। यह फैसला न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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