भारतीय राजनीति के गलियारों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के चर्चित चेहरे और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया है। यह कदम न केवल राजनीतिक तरीको से हैरान कर रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस पर बहस छिड़ गई है कि आखिर पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले Raghav Chadha के साथ ऐसा क्यों हुआ?
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र सौंपकर सूचित किया है कि अब Raghav Chadha की जगह सांसद अशोक मित्तल सदन में पार्टी के उपनेता होंगे। इतना ही नहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि पार्टी ने सचिवालय से अनुरोध किया है कि Raghav Chadha को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा और कड़ा एक्शन माना जा रहा है, क्योंकि राघव सदन में अक्सर जनहित के मुद्दों, जैसे डिलीवरी बॉयज की समस्या और एयरपोर्ट पर महंगी चाय, पर काफी मुखर रहते थे।
अनुशासनहीनता या पार्टी लाइन से दूरी?
हालांकि पार्टी ने इस फैसले का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि Raghav Chadha पर यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के चलते हुई है। बताया जा रहा है कि हाई कमान इस बात से नाराज था कि राघव कई मुद्दों पर बिना चर्चा किए अपनी बात रख रहे थे। वे सदन में क्या बोलेंगे, इसकी जानकारी भी अक्सर पार्टी को नहीं देते थे। Raghav Chadha पर आरोप है कि वे पार्टी की तय की गई लाइन से हटकर अपना व्यक्तिगत स्टाइल अपना रहे थे, जो सामूहिक निर्णय की नीति के खिलाफ था।
केजरीवाल और सिसोदिया की रिहाई पर चुप्पी
एक और बड़ी वजह जो सामने आ रही है, वह है रहस्यमयी चुप्पी। जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट से राहत मिली और उन्हें जमानत दी गई, तब पूरी पार्टी जश्न मना रही थी, लेकिन उस वक्त राघव चड्डा का कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया। पार्टी नेतृत्व को लगा कि वे महत्वपूर्ण मौकों पर पार्टी का स्टैंड मजबूती से रखने के बजाय बच रहे हैं। इसके अलावा, उनके ज्यादा समय लेने की वजह से पार्टी के अन्य सांसदों को सदन में बोलने का मौका कम मिल पा रहा था।
आप का अंदरूनी कलह और भविष्य
संजय सिंह की अनुपस्थिति के दौरान राघव चड्डा को अनौपचारिक रूप से बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन अब उन्हें इस तरह दरकिनार किए जाने से आम आदमी पार्टी के भीतर का कलह उजागर हो गया है। फिलहाल Raghav Chadha ने इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी के इस फैसले से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि व्यक्तिगत पहचान से ऊपर पार्टी का अनुशासन और सामूहिक फैसला है। अब देखना होगा कि अशोक मित्तल इस नई जिम्मेदारी को कैसे निभाते हैं।
राघव चड्डा को पद से हटाना आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है। एक तरफ जहाँ वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर बढ़ता तनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौतियां पेश कर सकता है।
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