महावीर जयंती 2026: पीएम मोदी ने गांधीनगर को दी ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ की सौगात, बोले- ‘महावीर के विचार ही संघर्षों का समाधान’

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गांधीनगर/नई दिल्ली: आज देशभर में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में भव्य ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ (Samrat Samprati Museum) का उद्घाटन कर देशवासियों को एक बड़ी सांस्कृतिक सौगात दी है।
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर न केवल भगवान महावीर के चरणों में शीश नवाया, बल्कि आधुनिक युग में उनके ‘सत्य और अहिंसा’ के सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर भी जोर दिया।

‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’: विरासत और तकनीक का संगम

गांधीनगर में नवनिर्मित यह संग्रहालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जैन इतिहास और भारतीय गौरव का एक जीवंत दस्तावेज है। इस संग्रहालय का नाम महान मौर्य शासक और सम्राट अशोक के पौत्र सम्राट संप्रति के नाम पर रखा गया है, जिन्हें इतिहास में ‘जैन धर्म का संरक्षक’ माना जाता है।

संग्रहालय की मुख्य विशेषताएं:

  • डिजिटल गैलरी: यहाँ भगवान महावीर के जीवन की ‘पंचकल्याणक’ घटनाओं को अत्याधुनिक 3D तकनीक और होलोग्राम के जरिए दिखाया गया है।
  • प्राचीन कलाकृतियाँ: यहाँ सम्राट संप्रति के काल की दुर्लभ मूर्तियों, पांडुलिपियों और जैन वास्तुकला के नमूनों को संरक्षित किया गया है।
  • अहिंसा कक्ष: एक विशेष खंड जो दुनिया भर में शांति और अहिंसा के आंदोलनों को समर्पित है।

पीएम मोदी का संबोधन: “महावीर का मार्ग ही मानवता का भविष्य”

संग्रहालय के उद्घाटन के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया युद्ध और संघर्षों से जूझ रही है, तब भगवान महावीर का दर्शन ही एकमात्र रास्ता दिखाता है।


“भगवान महावीर ने हमें सिखाया कि अहिंसा का मार्ग ही परम धर्म है। सम्राट संप्रति ने जिस तरह हजारों मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और अहिंसा का विस्तार किया, यह संग्रहालय उसी गौरवशाली परंपरा को हमारी युवा पीढ़ी तक पहुँचाएगा।” – पीएम मोदी


प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘सत्य’ और ‘अपरिग्रह’ (जरूरत से ज्यादा संचय न करना) जैसे सिद्धांत आज के ‘क्लाइमेट चेंज’ जैसे संकटों का भी समाधान देते हैं।

कौन थे सम्राट संप्रति?

इतिहास के पन्नों में सम्राट संप्रति का नाम एक ऐसे शासक के रूप में दर्ज है जिन्होंने अहिंसा को अपनी राजशक्ति से ऊपर रखा। उन्हें ‘द्वितीय अशोक’ भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने भारत और उसके बाहर हजारों जैन मंदिरों और चैत्यों का निर्माण करवाया था। गांधीनगर में बना यह नया संग्रहालय उन्हीं की दूरदर्शिता और जैन संस्कृति के प्रति उनके योगदान को समर्पित है।

देशभर में उत्सव का माहौल

सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत पूरे देश में महावीर जयंती की रौनक देखते ही बन रही है।

  • प्रभात फेरियां: सुबह-सुबह ‘जीयो और जीने दो’ के जयघोष के साथ भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं।
  • अभिषेक और पूजा: मंदिरों में भगवान महावीर का स्वर्ण और रजत कलशों से अभिषेक किया गया।
  • सेवा कार्य: इस अवसर पर जैन समाज द्वारा अस्पतालों में फल वितरण, जीव-दया के लिए दान और भंडारों का आयोजन किया गया है।

आज के दौर में क्यों जरूरी है महावीर का संदेश?

वर्तमान में जब समाज में वैचारिक मतभेद बढ़ रहे हैं, तब महावीर स्वामी का ‘अनेकांतवाद’ (Syadvada) हमें दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना सिखाता है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में भी इसी बात का जिक्र किया कि लोकतंत्र की असली ताकत ‘सबका साथ और सबके विकास’ में है, जो भगवान महावीर के दर्शन से ही प्रेरित है।

‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ का उद्घाटन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि यह शांति और संयम के भारतीय मूल्यों को वैश्विक मंच पर भी मजबूती प्रदान करेगा। महावीर जयंती के इस पावन पर्व पर, यह संग्रहालय नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक नया केंद्र बनने जा रहा है।

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