ईरान युद्ध के बीच इस्लामाबाद बना ‘पावर सेंटर’: सऊदी, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री पहुंच रहे पाकिस्तान; क्या रुकवा पाएंगे महायुद्ध?

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इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच पाकिस्तान एक बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने की तैयारी में है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के निमंत्रण पर दुनिया के तीन प्रभावशाली मुस्लिम देशों—सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र—के विदेश मंत्री रविवार और सोमवार को इस्लामाबाद के दौरे पर रहेंगे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और युद्धविराम के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है।

इस्लामाबाद में जुटेगी ‘मुस्लिम वर्ल्ड’ की चौकड़ी

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैजल बिन फरहान अल सऊद, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी इस अहम चर्चा के लिए पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 19 मार्च को इन चारों नेताओं ने रियाद में मुलाकात की थी, लेकिन अब युद्ध के गहराते संकट को देखते हुए इशाक डार ने इन्हें इस्लामाबाद आमंत्रित किया है। पहले यह बैठक तुर्किये में होनी थी, लेकिन कूटनीतिक व्यस्तताओं के चलते इसका केंद्र पाकिस्तान को बनाया गया है।

पीएम शहबाज शरीफ से होगी मुलाकात: एजेंडे में क्या है खास?

दौरे के दौरान तीनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगे। बैठक के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

  • तनाव कम करना: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सीधी जंग को रोकने के उपायों पर चर्चा।

  • क्षेत्रीय शांति: युद्ध प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता और स्थायी शांति के लिए रोडमैप तैयार करना।

  • मध्यस्थ की भूमिका: पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि वह वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच ‘मैसेंजर’ (संदेशवाहक) के रूप में काम कर रहा है।

ईरान के साथ ‘सीक्रेट’ बातचीत जारी

इशाक डार ने प्रेस से बातचीत में संकेत दिया कि पाकिस्तान पर्दे के पीछे से ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। हालांकि, उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ज्यादा जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान का दावा है कि वह पूरी ईमानदारी के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का लक्ष्य केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ना है।

क्या पाकिस्तान बनेगा ‘शांति का दूत’?

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों का एक साथ पाकिस्तान आना यह दर्शाता है कि मुस्लिम जगत वर्तमान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता को अहमियत दे रहा है। अगर यह ‘चौकड़ी’ किसी ठोस समाधान पर पहुँचती है, तो यह न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी राहत की खबर होगी। पाकिस्तान के लिए यह अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और कूटनीतिक लोहा मनवाने का एक बड़ा अवसर है।

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