Petrol-Diesel पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, तेल कंपनियों को राहत

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वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ईंधन की कीमतों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने Petrol पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है, वहीं डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म यानी शून्य कर दिया गया है। यह फैसला एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल थे। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आशंका जताई जा रही है।

आधी रात को हुई बैठक और कटौती की घोषणा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता को सुरक्षा देना था। पीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वैश्विक उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर न पड़े। इसके तुरंत बाद वित्त मंत्रालय ने Petrol और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने की अधिसूचना जारी कर दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सोशल मीडिया के जरिए बताया कि इस कटौती से ग्राहकों को भविष्य में होने वाली मूल्य वृद्धि से राहत मिलेगी।

तेल कंपनियों को मिलेगा इस फैसले का बड़ा लाभ

वित्त मंत्रालय की ओर से 26 मार्च को जारी अधिसूचना के मुताबिक, Petrol पर लगने वाला शुल्क अब 13 रुपये से घटकर सिर्फ 3 रुपये रह गया है। जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर घरेलू इस्तेमाल वाले पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।

इससे ग्राहकों को मूल्य वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस कटौती का सीधा असर शायद अभी पेट्रोल पंप की कीमतों में न दिखे। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस छूट का सीधा फायदा तेल कंपनियों को मिलेगा। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगभग 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं, लेकिन भारत में Petrol के दाम स्थिर रखे गए थे। इस वजह से तेल कंपनियां भारी दबाव में थीं, जिन्हें अब इस फैसले से बड़ी ऑक्सीजन मिली है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और ईंधन का गणित

भारत में Petrol और डीजल की कीमतें काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। अगर सरकार यह कटौती नहीं करती, तो आने वाले दिनों में Petrol की कीमतों में भारी उछाल आ सकता था। सरकार की इस रणनीति से कंपनियों को घाटे से उबरने में मदद मिलेगी और बाजार में ईंधन की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी। संसद को भी इस महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले की जानकारी दे दी गई है।

सरकार का यह फैसला एक बैलेंसिंग एक्ट की तरह है। एक तरफ Petrol पर टैक्स कम करके तेल कंपनियों के घाटे को कम किया गया है, तो दूसरी तरफ आम जनता को भविष्य की बड़ी महंगाई से बचाने की कोशिश की गई है। हालांकि, ग्राहकों को अपनी जेब में राहत महसूस करने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन यह साफ है कि सरकार वैश्विक संकट के बीच ईंधन के मोर्चे पर पूरी तरह सतर्क है।

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