पुरुलिया की रैली में गरजे योगी आदित्यनाथ: बोले- “राम भक्तों को दबा रही है TMC”, बंगाल में ‘डबल इंजन’ सरकार की जरूरत

Yogi Adityanath

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पुरुलिया: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, सियासी बयानबाजी और तेज होती जा रही है। इसी क्रम में सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुरुलिया पहुंचे, जहां उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला। योगी आदित्यनाथ ने TMC सरकार पर धार्मिक रीति-रिवाजों को दबाने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया।

“राम भक्तों का दमन और दुर्गा पूजा पर रोक”

पुरुलिया में उमड़ी भीड़ के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बंगाल की धरती महान संतों और समाज सुधारकों की धरती रही है। उन्होंने बंगाल को रामकृष्ण परमहंस की पवित्र भूमि बताते हुए नमन किया, लेकिन साथ ही वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “TMC सरकार राम भक्तों को दबाने का काम करती है। यहां दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों में बाधाएं डाली जाती हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में ‘डबल इंजन’ सरकार के फायदे गिनाते हुए कहा कि बंगाल के विकास के लिए अब बदलाव जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC सरकार तुष्टीकरण की सारी हदें पार कर रही है और इसके चलते राज्य के गरीबों का अधिकार छीना जा रहा है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बंगाल में भी ऐसी सरकार चाहिए जो बिना किसी भेदभाव के कानून का राज स्थापित कर सके।

भ्रष्टाचार और घुसपैठ से आजादी की मांग: अनुराग ठाकुर

योगी आदित्यनाथ के अलावा बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने भी सोमवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल की जनता का मन साफ है और वह बदलाव के लिए तैयार है। ठाकुर ने कहा कि बंगाल में लोगों की आवाज अब एकतरफा हो चुकी है और वे भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और घुसपैठ से पूरी तरह आजादी चाहते हैं।

उन्होंने महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों पर हो रहे कथित अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा, “ममता बनर्जी की विदाई का समय आ गया है। 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की जनता अब अत्याचार और कुशासन को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।” ठाकुर के अनुसार, बंगाल का चुनाव इस बार विकास बनाम विनाश का मुकाबला बन चुका है।

चुनाव का गणित और तारीखों का ऐलान

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर होने वाला यह चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी दल को 148 सीटों के जादुई आंकड़े को छूना होगा। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार:

  • पहला चरण: 23 अप्रैल को मतदान होगा।

  • दूसरा चरण: 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

  • नतीजे: 4 मई 2026 को मतगणना होगी और तय होगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

2021 के नतीजों का पिछला रिकॉर्ड

अगर पिछले विधानसभा चुनावों यानी 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। तब TMC ने 48.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 213 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी थी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी और उसने 38.5 प्रतिशत वोटों के साथ 77 सीटें हासिल की थीं। अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को उस समय मात्र कुछ ही सीटों पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस बार बीजेपी जिस तरह से आक्रामक प्रचार कर रही है, उसने मुकाबले को और भी कड़ा बना दिया है।

पुरुलिया और उत्तर बंगाल का महत्व

पुरुलिया जैसे जिले राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माने जाते हैं। यहां आदिवासी वोटों और स्थानीय मुद्दों का बड़ा प्रभाव रहता है। योगी आदित्यनाथ का यहां रैली करना यह दर्शाता है कि बीजेपी अपनी हिंदूवादी छवि और विकास के एजेंडे के जरिए इन क्षेत्रों में पैठ और मजबूत करना चाहती है। वहीं, अनुराग ठाकुर का भ्रष्टाचार और घुसपैठ पर बार-बार जोर देना राज्य के शहरी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं को साधने की कोशिश है। आने वाले कुछ दिनों में बंगाल की राजनीति में और भी बड़े नेताओं की रैलियां और जनसभाएं देखने को मिलेंगी, जिससे चुनावी पारा और बढ़ने की उम्मीद है।

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