प्रयागराज में यम द्वितीया मेला 2025: सुजावन देव मंदिर में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

प्रयागराज में यम द्वितीया मेला 2025: सुजावन देव मंदिर में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

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प्रयागराजः घुरपुर भीटा के सुजावन देव मंदिर में यम द्वितीया मेला, श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ किया दर्शन
प्रयागराज जिले के घुरपुर भीटा में स्थित सुजावन देव मंदिर यमुना नदी के बीच करीब सौ फुट ऊंचे टीले पर है। दीपावली के दूसरे दिन यहाँ भैया दूज पर यम द्वितीया मेला लगता है। मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए थे और यमुना जी के सत्कार से खुश होकर वरदान दिया कि यहाँ आकर उपासना करने वाले व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होगा। इस ऐतिहासिक मेले में प्रदेश और अन्य राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मेला भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम बन जाता है।

प्रयागराज जिले के घुरपुर भीटा में यम द्वितीया मेला, श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और उत्साह का प्रमुख स्थल है। यह मेले सुजावन देव मंदिर में दीपावली के दूसरे दिन, भैया दूज के अवसर पर आयोजित होता है। मंदिर यमुना नदी के बीच सौ फुट ऊंचे टीले पर स्थित है। मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए थे और यमुना के सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने कहा कि यहाँ आकर उपासना करने वाले व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होगा। इस धार्मिक मेले में प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं, जो भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम बनाता है। श्रद्धालु यमुना स्नान कर पुण्य प्राप्ति की कामना करते हैं और मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। मेले में प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधा का पूरा इंतजाम रहता है, जिससे श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।

यह मेला कार्तिक मास के धार्मिक महत्व को दर्शाता है, जिसमें यमुना स्नान पापों के क्षय और मोक्ष की प्राप्ति का अवसर माना जाता है। यम द्वितीया मेले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पवित्रता यहाँ के हर श्रद्धालु को आकर्षित करती है।

इस साल भी मेले में भारी संख्या में लोग शामिल हुए, जिससे भक्ति एवं उत्साह की अनुभूति हुई। मेले के दौरान मंदिर परिसर में “जय यमुना मैया” और “हर-हर सुजावन देव” के जयकारे गुंजायमान रहते हैं, जो आयोजन की गरिमा को और बढ़ाते हैं।

इस पावन अवसर पर, श्रद्धालु भाई-बहन के स्नेह और रिश्ते का प्रतीक स्वरूप एक साथ स्नान करते हैं, जिससे पुण्य लाभ की मान्यता है। यम द्वितीया मेला न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव है, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है।

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