18th BRICS Summit: राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए वैश्विक नेताओं का भारत आगमन जारी है। इसी क्रम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) भी नई दिल्ली (New Delhi) पहुंच चुके हैं। साल 2020 में हुई गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के संबंधों में जो तनाव और कड़वाहट आई थी, उसके बाद यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं।
एयरपोर्ट पर दिखा खास अंदाज और कूटनीतिक संकेत
शी जिनपिंग के नई दिल्ली पहुंचने पर हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने उनका औपचारिक स्वागत किया। एयरपोर्ट से सामने आई तस्वीरों में एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला, जहां शी जिनपिंग लगातार जितिन प्रसाद से बातचीत करते हुए नजर आए।
कूटनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि चीनी राष्ट्रपति का यह जेस्चर एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश हो सकता है। पूर्व राजनयिक सुशील सिंघल ने इस घटनाक्रम पर बात करते हुए कहा कि शी जिनपिंग का जितिन प्रसाद के साथ सहज होकर बातचीत करना चीन की तरफ से माहौल को सकारात्मक दिखाने का एक प्रयास है। सीमा विवाद के कारण लंबे समय से बने तनाव के बीच ऐसे छोटे संकेत भी कूटनीति में काफी मायने रखते हैं।
द्विपक्षीय बैठक और संबंधों को संभालने की कोशिश
चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की थी कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12 से 13 सितंबर तक चलने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं। इससे पहले बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई थी।
अब दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद है। भारत ने हमेशा से अपना रुख साफ रखा है कि दोनों देशों के संबंधों में निरंतर विकास और सुधार के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता का बना रहना सबसे पहली और प्रमुख शर्त है।
चीनी राजदूत का बयान और लगातार तीसरे साल मुलाकात
भारत में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बैठक की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीजिंग और नई दिल्ली दोनों शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था करने में जुटे हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रूस के कजान और चीन के तियानजिन में हुई बैठकों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा जब पीएम मोदी और शी जिनपिंग एक-दूसरे से मिलेंगे। चीनी राजदूत के अनुसार, चीन रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक नजरिए से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, बातचीत का दायरा बढ़ाने, मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी के रूप में सहयोग करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक सहयोग पर मंथन
इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ-साथ सहयोगी देशों और आउटरीच के तहत आमंत्रित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक चुनौतियों, बहुपक्षीय सहयोग और आपसी हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा।
शी जिनपिंग की इस भागीदारी से भारत और चीन दोनों पक्षों को अपने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक दिशा तय करने का एक अच्छा मौका मिलेगा, जो आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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