BRICS Summit : भारत की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। भारत की मेजबानी में हो रहा यह दो दिवसीय सम्मेलन शनिवार से शुरू होकर रविवार तक चलेगा। इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के सभी प्रमुख सदस्य देश, साझेदार राष्ट्र और विशेष रूप से आमंत्रित आउटरीच देशों के वैश्विक नेता एक मंच पर शामिल हो रहे हैं। अगर आप भी अंतरराष्ट्रीय मामलों और दुनिया में भारत की बढ़ती भूमिका के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह सम्मेलन बेहद खास है।
सम्मेलन की थीम और रणनीतिक एजेंडा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। इस मंच के माध्यम से वैश्विक नेता आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इसके साथ ही सभी देश अपनी साझा प्राथमिकताओं के आधार पर आपस में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के रास्तों पर खुलकर चर्चा करेंगे।
25 शहरों में आयोजित हुईं 350 से ज्यादा बैठकें
अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने इस आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए देश के 25 से ज्यादा प्रमुख शहरों में 350 से अधिक उच्च-स्तरीय बैठकों और कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया। इन सभी आयोजनों का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक, वित्तीय और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना रहा है। बिजनेस-टू-बिजनेस और जन-जन के बीच संवाद को बढ़ावा देकर भारत ने ब्रिक्स सहयोग को व्यावहारिक और विकास से जुड़े परिणामों की ओर तेजी से आगे बढ़ाया है।
20 साल का सफर और भारत की चौथी अध्यक्षता
विदेश मंत्रालय के बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी इसकी अध्यक्षता संभाल चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 से चौथी बार यह जिम्मेदारी संभाली है। यह साल ब्रिक्स संगठन के लिए भी बेहद खास है, क्योंकि इसके गठन के 20 साल पूरे हो रहे हैं। इस खास अवसर पर तैयार किया गया ब्रिक्स लोगो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम है, जिसकी पंखुड़ियों में सदस्य देशों के रंग और बीच में ‘नमस्ते’ की मुद्रा भारत के सम्मान और सामंजस्य की भावना को दर्शाती है।
वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग और सदस्य देश
आज के समय में ब्रिक्स संगठन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई जैसे प्रमुख देश शामिल हैं, जबकि कई अन्य देश इसके साझेदार राष्ट्र के रूप में जुड़े हैं। यह मंच आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार जैसे बड़े मुद्दों पर मिलकर काम कर रहा है।
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