Mamata Banerjee Press conference: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिले प्रचंड बहुमत के बाद राज्य में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। राज्य के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद, 15 साल तक सत्ता में रहीं निवर्तमान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee अपनी विधानसभा सीट तक नहीं बचा सकीं। इसके बावजूद, उनके द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने और चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। संविधान विशेषज्ञों और लोकतांत्रिक नियमों के अनुसार, जनता के स्पष्ट जनादेश के आगे किसी भी निवर्तमान नेता की मनमानी नहीं चल सकती।
जनादेश का सम्मान और संविधान के नियम
पश्चिम बंगाल का विधानसभा कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (pleasure of the Governor) ही अपने पद पर बने रह सकते हैं।
यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार जाता है या उनके पास बहुमत नहीं रहता, तो उनके पास सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं होता। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तो भी नई विधानसभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में कोई बाधा नहीं आती। राज्यपाल बिना उनके इस्तीफे के भी नई सरकार का गठन कर सकते हैं।
Mamata Banerjee के आरोपों पर उठे सवाल
Mamata Banerjee ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग और ईवीएम (EVM) पर कई आरोप लगाए, जिन्हें पूरी तरह से निराधार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ माना जा रहा है:
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EVM और चुनाव आयोग पर आरोप: Mamata Banerjee ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को ‘खलनायक’ बताया जबकि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और निष्पक्ष संस्था है, जिसकी देखरेख में हर चुनाव पारदर्शी तरीके से संपन्न होते हैं। सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बावजूद इस तरह के आरोप जनता के जनादेश का अपमान हैं।
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हिंसा और सुरक्षा पर आरोप: Mamata Banerjee ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का आरोप लगाया, जबकि चुनाव के दौरान पूरी सुरक्षा व्यवस्था चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों के हाथों में थी। इसके बावजूद TMC कार्यक्रताओ पर ही हिंसा भड़काने जैसे आरोप देखने को मिले।
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कैमरे बंद होने का विरोधाभास: उन्होंने एक बयान में कहा कि काउंटिंग के दौरान कैमरे बंद कर दिए गए थे, और तुरंत बाद यह भी कहा कि उन्होंने फुटेज देखी है। अब सवाल ये बनता है की एक ओर कैमरे बंद होने का दावा करना और दूसरी ओर फुटेज देखने की बात कहना, ममता बनर्जी के अपने दावों में विरोधाभास को स्पष्ट करता है।
‘डबल इंजन’ और जन-कल्याण का विजय रथ
भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की जनता को विकास, सुरक्षा और सुशासन का जो वादा किया है, बंगाल की जनता ने उस पर मुहर लगाई है। चुनावों में हुई हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति को नकार कर जनता ने शांति और प्रगति को चुना है। विपक्ष का INDIA गठबंधन भले हीMamata Banerjee को समर्थन देने की बात कर रहा हो, लेकिन लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सर्वोच्च होती है।
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