West Bengal की राजनीति में इस बार की गर्मियों ने वाकई इतिहास रच दिया है। कोलकाता की गलियों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक सिर्फ एक ही शोर है—बीजेपी की प्रचंड जीत। जिस Bengal में कभी बीजेपी संघर्ष कर रही थी, वहां इस बार जनता ने उन्हें 206 सीटों का भारी जनादेश दिया है। पिछली बार की 77 सीटों के मुकाबले 129 सीटों का यह इजाफा वाकई बड़ा है। लेकिन जीत के इस जश्न के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
जायंट किलर का दबदबा
सुवेंदु अधिकारी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने भवानीपुर सीट पर मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधे मुकाबले में शिकस्त दी है। पिछले पांच सालों से विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर सुवेंदु ने जमीन पर काफी पसीना बहाया है। 55 साल के सुवेंदु के पास प्रशासनिक अनुभव भी है और वह टीएमसी के गढ़ को ढहाना बखूबी जानते हैं। हालांकि, बीजेपी के पुराने रिकॉर्ड को देखें तो पार्टी अक्सर नए चेहरों से चौंकाने के लिए जानी जाती है, इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

दिल्ली की तर्ज पर क्या होगा महिला कार्ड?
राजनीतिक गलियारों में एक दिलचस्प चर्चा यह भी है कि क्या बीजेपी ममता बनर्जी के काट के तौर पर किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाएगी? केंद्र में बीजेपी ‘नारी वंदन’ और महिला आरक्षण की बात जोर-शोर से कर रही है, ऐसे में बंगाल में किसी महिला को कमान सौंपना एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक हो सकता है।
महिला दावेदारों में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
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रूपा गांगुली: वह लंबे समय से पार्टी का चेहरा रही हैं और बंगाल महिला मोर्चा की कमान भी संभाल चुकी हैं। सोनारपुर दक्षिण से जीतकर उन्होंने अपनी लोकप्रियता साबित की है।
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अग्निमित्रा पॉल: आसनसोल दक्षिण से जीतीं अग्निमित्रा भी एक मजबूत दावेदार हैं। उनकी उम्र (51 वर्ष) और काम करने का तरीका उन्हें रेस में बनाए रखता है।

अनुभव और युवाओं के बीच की कड़ी
सुवेंदु के अलावा तीन और दिग्गज नेता हैं जो इस रेस को दिलचस्प बना रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष (61 वर्ष) का पलड़ा इसलिए भारी है क्योंकि उन्हें बंगाल में बीजेपी को खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है और उन्हें आरएसएस का मजबूत समर्थन प्राप्त है। वहीं, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य (62 वर्ष) और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार (46 वर्ष) के नाम भी चर्चाओं में हैं। अमित शाह ने पहले ही साफ कर दिया था कि मुख्यमंत्री वही होगा जो बंगाली बोलने वाला और बंगाली मीडियम में पढ़ा लिखा ही होगा।
बंगाल में बदलाव की लहर अब हकीकत बन चुकी है। 9 मई की तारीख तय हो चुकी है, जब प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के मुताबिक नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होगा। अब देखना यह है कि बीजेपी आलाकमान सुवेंदु अधिकारी के अनुभव पर भरोसा जताता है या फिर रूपा गांगुली या अग्निमित्रा पॉल के जरिए महिला नेतृत्व का नया प्रयोग करता है। जो भी हो, बंगाल के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत है।
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