गुजरात के राजकोट जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। आमतौर पर शादियों में अड़चनें कुंडली या दहेज की वजह से आती हैं, लेकिन राजकोट के Veja gaon में वजह कुछ और ही है। यहाँ मच्छरों का प्रकोप इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ग्रामीणों को डर है कि अब उनके बेटों को कोई अपनी बेटी नहीं देगा। शाम होते ही इस गाँव की तस्वीर किसी डरावनी फिल्म जैसी हो जाती है, जहाँ मच्छरों के झुंड के सिवा कुछ दिखाई नहीं देता।

Veja gaon में आखिर क्यों बढ़ा मच्छरों का आतंक?
इस समस्या की जड़ Veja gaon के पास से गुजरने वाली नदी में छिपी है। दरअसल, नदी के प्रदूषित पानी के कारण उसमें बड़े पैमाने पर ‘जलकुंभी’ (Water Hyacinth) उग आई है। यह जलकुंभी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे सुरक्षित जगह होती है। दिन भर मच्छर इसी हरियाली में छिपे रहते हैं और सूरज ढलते ही पूरे गाँव पर धावा बोल देते हैं। स्थिति इतनी खराब है कि गाँव की सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल हो गया है क्योंकि मच्छर सीधे मुँह और नाक में घुसने लगते हैं।

मेहमान भी शाम होने से पहले भाग जाते हैं
Veja gaon के स्थानीय लोगों का दर्द यह है कि उनके घर आने वाले रिश्तेदार अब यहाँ रुकना नहीं चाहते। जैसे ही शाम होने वाली होती है, मेहमान अपना बोरिया-बिस्तर समेट लेते हैं। बाहरी लोगों के लिए इन मच्छरों के बीच एक रात काटना भी किसी सजा से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी बदनामी की वजह से अब लोग यहाँ अपनी बेटियों का रिश्ता लेकर आने से कतराने लगे हैं।

इंसानों के साथ पशुओं का भी बुरा हाल
यह समस्या सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। Veja एक ग्रामीण इलाका है जहाँ लगभग हर घर में पशुपालन होता है। मच्छरों से बचाने के लिए किसानों को अपने गाय-भैंसों के लिए बड़ी-बड़ी मच्छरदानियाँ बनवानी पड़ी हैं। अगर पशुओं को खुला छोड़ दिया जाए, तो मच्छरों के काटने से वे बीमार पड़ रहे हैं और उनका दूध उत्पादन भी काफी कम हो गया है। पशुओं की तकलीफ देखकर गाँव वाले बेहद लाचार महसूस कर रहे हैं।

7-8 साल से जूझ रहे हैं ग्रामीण
वेजा गांव में यह समस्या पिछले 7-8 वर्षों से लगातार बढ़ रही है। Veja gaon की एक बड़ी दिक्कत इसकी भौगोलिक स्थिति भी है। गाँव का आधा हिस्सा राजकोट महानगर निगम (RMC) के पास है और आधा RUDA के अंतर्गत आता है। जब ग्रामीण शिकायत लेकर जाते हैं, तो दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। गाँव के उपसरपंच ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नदी से जलकुंभी नहीं हटाई गई, तो Veja gaon के युवाओं की शादियाँ होना बंद हो जाएंगी।

क्या है समाधान? प्रशासन का एक्शन प्लान
बढ़ते शोर के बाद राजकोट महानगर निगम के कमिश्नर ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने माना कि Veja gaon की समस्या गंभीर है। उन्होंने बताया कि जलकुंभी को मशीन से हटाने पर वह दोबारा उग आती है। इसके स्थायी समाधान के लिए राजकोट प्रशासन ने लखनऊ नगर निगम से संपर्क किया है। लखनऊ में गोमती नदी को साफ करने के लिए ‘ट्रैश अरेस्टर’ (Trash Arrester) तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जो काफी सफल रहा है। चुनाव खत्म होते ही Veja gaon की नदी में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल कर जलकुंभी को जड़ से खत्म करने की योजना है।
Veja gaon के लोग फिलहाल इसी उम्मीद में हैं कि जल्द ही उन्हें इस मुसीबत से छुटकारा मिलेगा। एक तरफ जहाँ दुनिया विकास की बातें कर रही है, वहीं एक पूरे गाँव का भविष्य मच्छरों की वजह से दांव पर लगा है। उम्मीद है कि प्रशासन केवल कागजों पर प्लान न बनाकर जमीन पर जल्द काम शुरू करेगा, ताकि Veja gaon के युवाओं का घर बस सके और उन्हें इस ‘मच्छर राज’ से आजादी मिले।