BRICS Meeting in Kashi: दुनिया के सबसे प्राचीन और जीवंत शहरों में शुमार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) में आज से एक वैश्विक सांस्कृतिक महाकुंभ की शुरुआत होने जा रही है। वाराणसी इस बार ब्रिक्स (BRICS) देशों के मेहमानों की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह से सज-धज कर तैयार है, जहाँ BRICS सांस्कृतिक कार्य समूह (BRICS Culture Working Group) की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार और शुक्रवार को आयोजित की जा रही है। इस दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत और विदेशों के वरिष्ठ राजनयिकों, नीति निर्माताओं और सांस्कृतिक विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर एक साथ लाना है। यह अंतर्राष्ट्रीय बैठक वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच आपसी रणनीतिक और सामाजिक संबंधों को एक नई वैचारिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
वैश्विक मंच पर काशी को मिलेगा बड़ा अवसर
यह भव्य और बहुप्रतीक्षित अंतर्राष्ट्रीय आयोजन बाबा विश्वनाथ की पवित्र नगरी काशी के लिए अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक चेतना और अनूठी परंपराओं को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पूरी भव्यता के साथ प्रदर्शित करने का एक स्वर्णिम अवसर लेकर आया है। इस बैठक के दौरान आने वाले विदेशी मेहमानों के समक्ष काशी की अनूठी जीवनशैली, गंगा घाटों की अलौकिक आभा और यहाँ के संगीत व कला के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से काशी की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत न केवल दुनिया के नक्शे पर और अधिक मजबूती से स्थापित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक कूटनीति को भी एक नई दिशा और वैश्विक सम्मान मिलेगा।
BRICS Meeting: वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बना उत्तर प्रदेश
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश वैश्विक आयोजनों और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभरकर सामने आया है। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर दूरदर्शी प्रयास रहे हैं, जिन्होंने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, वैश्विक पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और इन सभी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। राज्य सरकार की इसी प्रशासनिक मुस्तैदी और सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की नीति के कारण ही आज उत्तर प्रदेश दुनिया भर के बड़े और महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजनों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है।
काशी के ‘जीआई’ और ‘ओडीओपी’ उत्पादों की लगेगी विशेष प्रदर्शनी
इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के सबसे खास और मुख्य आकर्षणों में से एक काशी के विश्वप्रसिद्ध जीआई-टैग (GI-tagged) और ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) के तहत आने वाले हस्तशिल्प उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी होगी। इस अनूठी प्रदर्शनी में क्षेत्र के छह चुनिंदा और ख्यातिप्राप्त शिल्पकार व कारीगर अपने छह अद्वितीय उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन करेंगे, जो काशी की सदियों पुरानी कला, बेहतरीन शिल्प कौशल और समृद्ध हस्तशिल्प विरासत की सजीव कहानी बयां करते हैं। आज के समय में काशी के इन हस्तनिर्मित और पारंपरिक उत्पादों ने न केवल पूरे भारत में बल्कि दुनिया के कई विकसित देशों में अपनी एक विशिष्ट और स्वतंत्र पहचान स्थापित कर ली है, जिसे अब इस ब्रिक्स सम्मेलन के माध्यम से एक और बड़ा वैश्विक बाजार मिलने की उम्मीद है।
11 देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होंगे शामिल
वाराणसी में आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक दो दिवसीय सांस्कृतिक शिखर सम्मेलन में दुनिया के ग्यारह प्रमुख और शक्तिशाली देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि और राजनयिक शिरकत कर रहे हैं। इस वैश्विक बैठक की मेजबानी कर रहे भारत के अलावा इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र (Egypt), इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधिमंडल प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो रहे हैं। इन सभी देशों के राजनयिकों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में होने वाले इस गहन विमर्श से जहाँ वैश्विक सांस्कृतिक नीतियों को एक नया रोडमैप मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विदेशी मेहमानों के माध्यम से भारतीय कला, संस्कृति और शिल्प कौशल का गौरव सात समंदर पार तक और अधिक मजबूती से फैलेगा।
