वाराणसी की फिज़ाओं में गुरुवार को एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में यह दिन भारतीय सेना के जांबाज सैनिकों के नाम रहा। मौका था 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ का, जिसे लेकर शहर के अलग-अलग संगठनों ने कई कार्यक्रम आयोजित किए। पूरे दिन शहर में 'भारत माता की जय' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे।

सेना के सम्मान में सजे घाट
दशाश्वमेध घाट पर शाम का नजारा बहुत भावुक करने वाला था। यहां होने वाली विश्व प्रसिद्ध Ganga Aarti से ठीक पहले भारतीय सेना के शौर्य को याद किया गया। गंगा सेवा निधि की ओर से आयोजित इस खास कार्यक्रम में सात वैदिक ब्राह्मणों ने शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच शौर्य दीप जलाए। इस Ganga Aarti को देखने आए लोगों के हाथों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखे पोस्टर थे, जो सैनिकों के प्रति उनके सम्मान को दर्शा रहे थे।

शहीदों की याद में दीपदान
अर्चकों ने वैदिक रीति-रिवाज के साथ जलते हुए दीपों को गंगा की लहरों में प्रवाहित किया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ और मां गंगा से प्रार्थना की गई कि देश से आतंकवाद का खात्मा हो। Ganga Aarti के इस मंच से पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों को भी याद किया गया और उनकी आत्मा की शांति के लिए दीपदान किया गया। घाट पर मौजूद हर शख्स इस Ganga Aarti के दौरान देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

काशी की अटूट आस्था और देशभक्ति
वाराणसी में Ganga Aarti केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह देश की भावनाओं को जोड़ने का माध्यम भी है। ऑपरेशन सिंदूर की याद में हुई इस Ganga Aarti ने एक बार फिर दिखा दिया कि काशी के लोग अपनी सेना के साथ मजबूती से खड़े हैं।
वाराणसी की यह शाम भारतीय सेना के साहस और बलिदान को एक सच्ची श्रद्धांजलि थी। आस्था और देशभक्ति के इस मेल ने वहां मौजूद हर श्रद्धालु के दिल को छू लिया।
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