वाराणसी के चेतगंज में नक्कटैया का आयोजन कल रात बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर रामलीला के मंचन में भगवान राम, लक्ष्मण और शूर्पणखा के संवादों का प्रदर्शन किया गया। इस विशेष मंचन में भगवान लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का दृश्य दर्शकों का मन मोह गया। नक्कटैया में लगभग 100 से अधिक झांकियां और रामलीलाएं जुलूस के साथ प्रस्तुत की गईं, जिनमें धार्मिक और सांस्कृतिक संदेशों का समावेश था।

मेले में उपस्थित युवाओं और दर्शकों ने डीजे की धुन पर नृत्य किया और उत्सव का आनंद लिया। “ऑपरेशन सिंदूर” की झांकी और अन्य भगवान से संबंधित लीलाओं का भी मंचन किया गया। चेतगंज रामलीला समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि नक्कटैया सैकड़ों वर्षों से वाराणसी की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में यह झांकियां जनता तक संदेश पहुँचाने का माध्यम थीं और स्वतंत्रता संग्राम में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल झांकियों में न सिर्फ धार्मिक कथाएं प्रस्तुत की गईं बल्कि सामाजिक संदेश भी समाहित थे। चेतगंज के युवाओं और बच्चों ने भी इसमें भाग लिया और रामलीला के पात्रों के साथ संवाद और अभिनय में अपनी प्रतिभा दिखाई। झांकियों की सजावट और कलाकारों की तैयारी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन के दौरान विभिन्न झांकियों में रामायण की लीलाओं के अलावा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी झांकियां भी प्रस्तुत की गईं। यह दर्शाता है कि नक्कटैया केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक चेतना का भी माध्यम है। आयोजकों ने बताया कि आने वाले वर्षों में इसे और भी भव्य बनाने की योजना है, ताकि नई पीढ़ी भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे।
दर्शकों का उत्साह इस बात का प्रमाण था कि नक्कटैया ने युवा पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा देने का काम किया। उन्होंने मंचन और झांकियों की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के आयोजन बनारस की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं।
“यह आयोजन चेतगंज की सांस्कृतिक पहचान है। झांकियां और रामलीला सैकड़ों वर्षों से समाज को संदेश देने का माध्यम रही हैं। इसे देखकर गर्व होता है।” — अजय गुप्ता, चेतगंज रामलीला समिति अध्यक्ष
“हमने बहुत आनंद लिया। मंचन और झांकियों की सजावट अद्भुत थी। इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ते हैं।” — नक्कटैया में आए दर्शक







